
समीक्षा में सामने आई लंबित मामलों की वजह; बैंकों को एक सप्ताह में शुल्क जमा कराने का निर्देश, सितंबर में कैंप मोड में निपटाए जाएंगे मामले
बांका:- बैंक का बकाया समाप्त होने और नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी होने के बाद भी कई नीलाम पत्रवाद सरकारी रिकॉर्ड में लंबित पड़े हैं। वजह है कोर्ट फी और तलवाना शुल्क का जमा नहीं होना। नीलाम पत्रवादों की समीक्षा के दौरान ऐसे मामले सामने आने के बाद संबंधित बैंकों को एक सप्ताह के भीतर आवश्यक शुल्क जमा कराने का निर्देश दिया गया है, ताकि मामलों का अंतिम रूप से निष्पादन किया जा सके। जिला पदाधिकारी अंशुल अग्रवाल के निर्देश पर प्रभारी पदाधिकारी, जिला नीलाम पत्र शाखा की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में नीलाम पत्रवादों के त्वरित निष्पादन को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में लंबित मामलों की स्थिति केवल आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि संबंधित अभिलेखों और पंजियों का मिलान कर जांची गई।
रजिस्टर-9 और 10 से मिलाए गए अभिलेख
समीक्षा के दौरान सभी नीलाम पत्र पदाधिकारियों तथा संबंधित अधियाची विभागों एवं बैंकों को अपने अभिलेखों के साथ उपस्थित रहने को कहा गया था। बैठक में रजिस्टर-9 एवं रजिस्टर-10 का संबंधित रिकॉर्ड से मिलान किया गया। मिलान का उद्देश्य यह पता लगाना था कि कितने मामले वास्तव में लंबित हैं, किन मामलों में राशि का भुगतान हो चुका है और किन प्रक्रियागत कारणों से वाद का अंतिम निष्पादन नहीं हो पाया है।
नो ड्यूज जारी, फिर भी बंद नहीं हुए कई वाद
अभिलेखों की समीक्षा में सामने आया कि कई मामलों में संबंधित बैंक नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी कर चुके हैं, लेकिन कोर्ट फी एवं तलवाना शुल्क जमा नहीं होने के कारण संबंधित नीलाम पत्रवाद अब भी लंबित हैं। यानी बकाया से संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद आवश्यक शुल्क जमा नहीं होने से रिकॉर्ड में केस का अंतिम निष्पादन नहीं हो पा रहा है। इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित बैंकों को लंबित औपचारिकता जल्द पूरी करने को कहा गया।
बैंकों को मिला एक सप्ताह का समय
बैठक में सभी संबंधित बैंकों को एक सप्ताह के भीतर कोर्ट फी और तलवाना शुल्क जमा कराने का निर्देश दिया गया। शुल्क जमा होने के बाद ऐसे मामलों के अंतिम निष्पादन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। साथ ही स्पष्ट किया गया कि इस प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही के कारण मामला लंबित रहता है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित अधियाची विभाग अथवा बैंक की होगी।
सितंबर में ‘कैंप मोड’ में चलेगा निपटारा
लंबित नीलाम पत्रवादों की संख्या घटाने के लिए अब सामान्य प्रक्रिया के बजाय कैंप मोड में काम करने पर जोर दिया गया है। सभी नीलाम पत्र पदाधिकारियों, अधियाची विभागों और बैंकों को आपसी समन्वय के साथ मामलों के निष्पादन में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। सितंबर महीने के दौरान लंबित वादों में अपेक्षित प्रगति सुनिश्चित करने और जिन मामलों में आवश्यक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, उनका शीघ्र अंतिम निष्पादन करने को कहा गया है। समीक्षा का फोकस साफ रहा—जहां बकाया समाप्त हो चुका है और नो ड्यूज भी जारी हो गया है, वहां केवल प्रक्रियागत औपचारिकता के कारण नीलाम पत्रवाद फाइलों में लंबित नहीं रहना चाहिए।








