
कटोरिया के लीलावरण गांव में हो रहे कार्यों को डीएम अंशुल अग्रवाल ने किया प्रस्तुत, दूसरे जिलों को भी पहल अपनाने के लिए किया गया प्रेरित
बांका:- प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में बांका जिले में किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। सोमवार को भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आमंत्रण पर बांका के जिला पदाधिकारी अंशुल अग्रवाल ने राष्ट्रीय मंच पर जिले की पहल और कटोरिया प्रखंड के लीलावरण गांव में प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को प्रस्तुत किया। इस दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बांका में हो रहे प्रयासों की सराहना की और अन्य जिलों को भी इस पहल से सीख लेने तथा इसे अपनाने की दिशा में काम करने की बात कही। राष्ट्रीय मंच पर बांका का प्रतिनिधित्व करते हुए डीएम अंशुल अग्रवाल ने बताया कि जिले में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को जागरूक और प्रेरित करने के साथ-साथ विभिन्न कृषि योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य खेती को अधिक टिकाऊ बनाना और किसानों को ऐसी पद्धतियों की ओर प्रोत्साहित करना है, जिनसे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण हो सके।
लीलावरण गांव के प्रयासों पर विशेष जोर
कटोरिया प्रखंड का लीलावरण गांव प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में जिले की पहल का प्रमुख उदाहरण बनकर सामने आया। यहां किसानों को वैज्ञानिक मार्गदर्शन देने, मिट्टी के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने पर ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की कृषि योजनाओं के बीच समन्वय स्थापित कर किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के पीछे खेती की लागत कम करने, मिट्टी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने तथा किसानों की आय और आजीविका को अधिक टिकाऊ बनाने का लक्ष्य है। इसके लिए किसानों की भागीदारी और उन्हें सही कृषि संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने दूसरे जिलों को भी सीख लेने को कहा
कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बांका जिले में प्राकृतिक खेती को लेकर किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने इन प्रयासों को उल्लेखनीय बताते हुए देश के अन्य जिलों को भी बांका की पहल से सीख लेने और उसे अपनाने की दिशा में काम करने की बात कही। राष्ट्रीय मंच पर मिली इस सराहना को बांका जिले के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। इससे प्राकृतिक खेती को लेकर जिले में किए जा रहे प्रयासों को व्यापक स्तर पर सामने रखने का अवसर मिला है। साथ ही टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए जिले में चल रही पहल पर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान गया है।
प्रशासन, कृषि विभाग और किसानों के समन्वय का परिणाम
जिला प्रशासन के अनुसार, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में जिला प्रशासन, कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, संबंधित संस्थानों और किसानों के बीच समन्वय की अहम भूमिका है। किसानों की सक्रिय भागीदारी के साथ वैज्ञानिक मार्गदर्शन, मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और योजनाओं के बेहतर समन्वय पर लगातार जोर दिया जा रहा है। बांका जिला प्रशासन ने प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को आगे बढ़ाने, किसानों को सशक्त बनाने तथा जिले में किए जा रहे प्रयासों को व्यापक स्तर पर प्रसारित करने की प्रतिबद्धता जताई है। अब राष्ट्रीय मंच पर मिली सराहना के बाद लीलावरण गांव में हो रहे कार्यों को दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचाने और किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति प्रेरित करने की पहल को नई पहचान मिली है।


BANKA NEWS: प्राकृतिक खेती में







