
स्कूली बच्चों और बीमार लोगों की राह मुश्किल, विधायक-सांसद की उदासीनता पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
रिपोर्ट:- उमाकांत पोद्दार।
चांदन/बांका:- चांदन प्रखंड की कोरिया पंचायत अंतर्गत घोंघदाबर रोड की बदहाल स्थिति से ग्रामीणों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। पिछले करीब 20 वर्षों से जर्जर पड़े इस कच्चे संपर्क मार्ग पर आज भी ग्रामीण बदहाली के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे और कीचड़ जमा होने से लोगों का आवागमन मुश्किल हो गया है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों को उठानी पड़ रही है।ग्रामीणों के अनुसार, घोंघदाबर रोड चांदन प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने का प्रमुख संपर्क मार्ग है। इसके बावजूद सड़क की बदहाली दूर करने के लिए अब तक कोई ठोस पहल नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है। बारिश के दौरान या सड़क पर कीचड़ जमा होने की स्थिति में पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। स्कूली बच्चों को इसी रास्ते से होकर विद्यालय जाना पड़ता है, जबकि बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने में भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर कब तक गांव के लोग ऐसी बदहाल सड़क पर चलने को मजबूर रहेंगे? चुनाव के दौरान विकास के वादे किए जाते हैं, लेकिन सड़क की मौजूदा स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने वर्तमान विधायक और सांसद की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि क्या जनप्रतिनिधियों को इस बात की जानकारी नहीं है कि उनके क्षेत्र के मतदाता किस हालात में जीवन गुजार रहे हैं? करीब दो

दशक से सड़क की समस्या बने रहने के बावजूद इसका समाधान नहीं होना ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय है।इधर, ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कोरिया गांव निवासी मनोज यादव द्वारा निजी कार्य के लिए जेसीबी मशीन से मिट्टी की लोडिंग तथा लगातार तीन ट्रैक्टरों के परिचालन से कच्चा रास्ता और अधिक क्षतिग्रस्त हो गया है। ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क पर दो से तीन फीट तक गहरे गड्ढे बन गए हैं और कई जगह कीचड़ जमा है। हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से स्थल निरीक्षण कराकर सड़क की स्थिति और क्षति के कारणों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।इस समस्या को लेकर राजद पंचायत अध्यक्ष उपेन्द्र यादव के साथ योधन यादव, प्रशांत कुमार बरनवाल, विजय कुमार, उमेश यादव, महेश कुमार, पवन कुमार, टुनटुन कुमार एवं सतनारायण यादव सहित अन्य ग्रामीणों ने चिंता जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाली के कारण रोजमर्रा के कामकाज के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई और बीमार लोगों को इलाज के लिए ले जाने में भी परेशानी होती है। उनका मानना है कि सड़क की मरम्मत में और देरी होने से समस्या और गंभीर हो सकती है।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से घोंघदाबर रोड का स्थलीय निरीक्षण कराने, सड़क को क्षतिग्रस्त करने के आरोपों की जांच करने तथा दोष सिद्ध होने पर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही, तत्काल मिट्टी भराई, गड्ढों की मरम्मत और सड़क के समतलीकरण के साथ स्थायी निर्माण की दिशा में पहल करने की अपील की है। अब देखना यह है कि ग्रामीणों की इस समस्या पर जिला प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधि कब तक संज्ञान लेते हैं और घोंघदाबर रोड की बदहाल तस्वीर बदलने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।









