
DLMC की बैठक में न्यायिक आधारभूत संरचना, गवाहों की समय पर उपस्थिति और चार्जशीट दाखिल करने में देरी पर हुई चर्चा
बांका:- न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने, लंबित मामलों के निष्पादन में होने वाली देरी कम करने और अपराध से प्रभावित लोगों को राहत उपलब्ध कराने को लेकर बुधवार को बांका में जिला स्तरीय निगरानी समिति (DLMC) की बैठक आयोजित की गई। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में न्यायिक आधारभूत संरचना के विकास, गवाहों की समय पर उपस्थिति, आरोप-पत्र दाखिल करने में विलंब और पीड़ितों को मुआवजा देने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर न्यायिक कार्यों को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
न्यायालय और आवासीय परिसर के लिए 10 एकड़ भूमि चिह्नित
बैठक में न्यायिक आधारभूत संरचना के विकास से जुड़े विषय पर चर्चा के दौरान बताया गया कि न्यायालय परिसर और न्यायिक पदाधिकारियों के आवासीय परिसर के निर्माण के लिए 10 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है। इस पहल के तहत न्यायिक कार्यों के सुचारू संचालन और आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के विकास पर विचार-विमर्श किया गया। न्यायिक व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए आधारभूत संरचना का विकास महत्वपूर्ण माना जाता है। बैठक में इस दिशा में संबंधित विषयों पर चर्चा करते हुए आवश्यक समन्वय और कार्यों की प्रगति पर ध्यान देने की बात कही गई।
गवाहों की अनुपस्थिति से न्यायिक प्रक्रिया में देरी पर चिंता
बैठक में अनुसंधानकर्ताओं के निर्धारित तिथि पर न्यायालय में उपस्थित नहीं होने के कारण गवाही की प्रक्रिया में होने वाली देरी पर चिंता व्यक्त की गई। इस संबंध में निर्देश दिया गया कि संबंधित अनुसंधानकर्ता और चिकित्सक गवाही के लिए निर्धारित तिथि पर समय से न्यायालय में उपस्थित हों, ताकि सुनवाई प्रभावित न हो। आवश्यकता के अनुसार और विधि के प्रावधानों के अनुरूप वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी गवाही सुनिश्चित करने की व्यवस्था करने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य न्यायिक कार्यवाही को अनावश्यक रूप से लंबा होने से रोकना और निर्धारित प्रक्रिया के तहत मामलों की सुनवाई में तेजी लाना है।
समय पर चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश
आपराधिक मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए संबंधित अनुसंधान एजेंसियों को समय पर आरोप-पत्र यानी चार्जशीट समर्पित करने का निर्देश दिया गया। बैठक में इस बात पर बल दिया गया कि अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में अनावश्यक विलंब से बचने के लिए संबंधित पदाधिकारी निर्धारित समय-सीमा और कानूनी प्रावधानों का पालन करें। गवाहों की समय पर उपस्थिति और आरोप-पत्र दाखिल करने में समयबद्धता से न्यायिक कार्यवाही को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इस दिशा में विभागीय समन्वय को महत्वपूर्ण बताया गया।
पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत पांच मामलों में मुआवजे का निर्णय
बैठक में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बांका के अंतर्गत पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत प्राप्त मामलों की भी समीक्षा की गई। विचार-विमर्श के बाद पांच मामलों में पीड़ितों को मुआवजा प्रदान करने का निर्णय लिया गया। यह निर्णय संबंधित योजना के प्रावधानों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लिया गया, ताकि अपराध से प्रभावित लोगों को आवश्यक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा सके। पीड़ित प्रतिकर योजना का उद्देश्य पात्र पीड़ितों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराना है। बैठक में इस विषय पर विचार करते हुए संबंधित मामलों में प्रक्रिया के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
बेहतर समन्वय से न्यायिक कार्यों में तेजी लाने पर बल
बैठक के दौरान न्यायिक आधारभूत संरचना के विकास, अनुसंधान की समयबद्धता, गवाहों की उपस्थिति और पीड़ितों को उचित प्रतिकर उपलब्ध कराने से जुड़े विषयों पर संबंधित विभागों और पदाधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता जताई गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली अनावश्यक देरी को कम करना, न्यायालयों के कार्यों को सुचारू बनाना और पीड़ितों को निर्धारित प्रावधानों के तहत समय पर सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयासों को मजबूत करना रहा।


BANKA NEWS: बांका में न्यायिक







