
शहरों में पेंट-पुताई का चलन, गांवों में आज भी पारंपरिक तरीके से घरों को संवार रहीं महिलाएं
रिपोर्ट:- उमाकांत पोद्दार।
चांदन/बांका:- दिवाली और छठ महापर्व को लेकर चांदन प्रखंड और आसपास के ग्रामीण इलाकों में तैयारियां जोरों पर हैं। पर्व को लेकर जहां शहरों में घरों की रंगाई-पुताई और सजावट का दौर चल रहा है, वहीं गांवों में आज भी मिट्टी और गोबर से घरों को लीपने की पुरानी परंपरा कायम है। महिलाएं सुबह से ही मिट्टी गूंथने, गोबर मिलाने और घरों की दीवारों व आंगन को अपने हाथों से संवारने में जुटी हैं।ग्रामीण गलियों में पारंपरिक जीवनशैली की झलक साफ दिखाई दे रही है। कहीं महिलाएं बांस की सीढ़ी के सहारे ऊंची दीवारों को लीप रही हैं, तो कहीं सिर पर पानी का बर्तन लेकर घरों की साफ-सफाई में जुटी हैं। आधुनिक रंगों और पेंट के बढ़ते प्रचलन के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक तरीके से घरों को सजाने का सिलसिला जारी है।
ग्रामीणों के अनुसार, मिट्टी और गोबर से लिपाई करना केवल साफ-सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परंपरा आस्था और ग्रामीण संस्कृति से भी जुड़ी हुई है। इसे घर को स्वच्छ रखने और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार पवित्र बनाने का तरीका माना जाता है। छठ महापर्व के दौरान इस परंपरा का विशेष महत्व होता है। व्रती महिलाएं पूजा स्थल, आंगन और प्रसाद बनाने की जगह की विशेष साफ-सफाई करती हैं। कई परिवारों में छठ का प्रसाद तैयार करने के लिए नए या विशेष रूप से तैयार किए गए चूल्हे का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में घर की लिपाई और शुद्धता का ध्यान रखना पर्व की तैयारियों का अहम हिस्सा बन जाता है। आधुनिकता के दौर में भी चांदन के ग्रामीण इलाकों में इस परंपरा का कायम रहना गांवों की सांस्कृतिक विरासत और पारिवारिक अपनत्व को दर्शाता है। दिवाली और छठ के अवसर पर अपने हाथों से घरों को संवारती महिलाएं आज भी इस परंपरा को जीवंत बनाए हुए हैं।


CHANDAN NEWS: दिवाली-छठ पर चांदन








