
बौंसी/बांका। खेतों की मिट्टी को स्वस्थ रखने, रासायनिक उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बौंसी प्रखंड की कसबा मंदार पंचायत में कृषि जन कल्याण चौपाल-सह-खेत बचाव अभियान 2026 का आयोजन किया गया। चौपाल में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, मौसम अनुकूल खेती और कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में महिला किसानों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। देशभर में शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य किसानों को खेती की नई पद्धतियों से जोड़ना, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना है। इसके तहत दलहन एवं तिलहन की खेती, रबी फसलों में कीट-व्याधि नियंत्रण, फल-फूल और सब्जी उत्पादन तथा जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मिट्टी की जांच और संतुलित उर्वरक उपयोग का संदेश
कार्यक्रम का संयोजन बांका के सहायक निदेशक (रसायन) डॉ. कृष्ण कांत ने किया। उन्होंने कहा कि खेत बचाव अभियान के माध्यम से किसानों को मृदा प्रबंधन और प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक किया जा रहा है। किसानों को सलाह दी गई कि वे मिट्टी की जांच कराएं और मृदा स्वास्थ्य कार्ड में दी गई अनुशंसाओं के अनुसार ही उर्वरकों का इस्तेमाल करें। उन्होंने बताया कि किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड, फसल बीमा, डिजिटल एग्रीकल्चर और उर्वरकों के संतुलित उपयोग से संबंधित जानकारी एवं प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। विभिन्न पंचायतों में कृषि जन कल्याण चौपाल के माध्यम से यह कार्यक्रम 30 नवंबर तक संचालित किया जाएगा।
125 किसानों का क्लस्टर, प्राकृतिक खेती में महिलाओं की सक्रिय भूमिका
कसबा मंदार पंचायत में 125 किसानों का एक क्लस्टर बनाकर प्राकृतिक खेती की जा रही है, जिसमें महिला किसान प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस व्यवस्था के तहत प्रत्येक किसान को सरकार की ओर से निर्धारित शर्तों के अनुसार 2,000 रुपये की सहयोग राशि दी जाती है। प्रत्येक 125 किसानों के क्लस्टर पर दो जीविका दीदियां कृषि सखी के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें सरकार की ओर से प्रतिमाह 5,000 रुपये की सहयोग राशि दी जाती है। कृषि सखियां किसानों के बीच बैठक और चौपाल आयोजित कर प्राकृतिक खेती की विधियों, जैविक उपादानों के निर्माण और उनके इस्तेमाल की जानकारी साझा करती हैं। डॉ. कृष्ण कांत ने बताया कि जिले में पहले से नौ क्लस्टरों के माध्यम से प्राकृतिक खेती कराई जा रही है। प्रत्येक क्लस्टर में 125 किसान पंजीकृत हैं। किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने और खेतों में उपयोग होने वाले जैविक उपादान स्वयं तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

जैविक खाद बनाने का प्रशिक्षण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित
चौपाल के दौरान किसानों के बीच मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण किया गया। इसके साथ ही किसानों को स्थानीय जैव उत्पाद केंद्र का भ्रमण कराया गया, जहां उन्हें वर्मीकम्पोस्ट और जीवामृत जैसे जैविक उपादान तैयार करने की विधियों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में बताया गया कि प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों को रासायनिक खेती के संभावित दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और जैविक विकल्पों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना अभियान का प्रमुख उद्देश्य है। इसके अलावा रबी मौसम की फसलों में कीट एवं रोगों के प्रबंधन के लिए भी किसानों को तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
सब्जी उत्पादन और बाजार उपलब्धता पर भी पहल
सहायक निदेशक (रसायन) डॉ. कृष्ण कांत ने कहा कि क्षेत्र की महिला किसान सब्जी उत्पादन में सक्रिय हैं। कृषि विभाग उन्हें विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहा है। साथ ही जैविक उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार की उपलब्धता सुनिश्चित करने में हरसंभव सहयोग करने की बात कही गई। स्थानीय जैव उत्पाद केंद्र के संचालक रणवीर सिंह ने बताया कि क्षेत्र के सैकड़ों किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और इससे लाभ उठा रहे हैं। इस अवसर पर जिला से प्रखंड कृषि पदाधिकारी (जैविक) आदर्श सहनी, प्रखंड कृषि पदाधिकारी (मृदा विश्लेषण) शालिनी प्रिया और वंदना कुमारी ने भी किसानों को मिट्टी की सेहत बनाए रखने, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और संतुलित उर्वरक उपयोग के बारे में जानकारी दी।
खेती को टिकाऊ बनाने की दिशा में पहल
कसबा मंदार में आयोजित यह चौपाल किसानों को पारंपरिक अनुभव और आधुनिक कृषि तकनीकों के समन्वय से खेती करने के लिए प्रेरित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मिट्टी की जांच, जैविक खाद का उपयोग, फसल विविधीकरण और महिला किसानों की भागीदारी के माध्यम से खेती को अधिक टिकाऊ बनाने पर जोर दिया गया। अभियान के जरिए किसानों को कृषि विभाग की योजनाओं से जोड़ने, उत्पादन संबंधी समस्याओं का समाधान करने और प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।


BOUNSI NEWS: कसबा मंदार में








