मुंगेर। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के अधीन संचालित खड़गपुर सरकारी बस स्टैंड अपनी बदहाल व्यवस्था और जर्जर बुनियादी ढांचे के कारण यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। वर्षों से मरम्मत और विकास कार्यों की अनदेखी के कारण बस स्टैंड की स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। नगर पंचायत से नगर परिषद का दर्जा मिलने के बाद लोगों को बेहतर सुविधाओं की उम्मीद थी, लेकिन हालात में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हो सका है।
जर्जर भवन में चल रहा बस स्टैंड का संचालन
बस स्टैंड परिसर में स्थित कार्यालय, टिकट काउंटर और अन्य भवन पूरी तरह जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं। कई जगहों पर दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं और छतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने के कारण कर्मचारियों को काम करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं यात्रियों के लिए पर्याप्त बैठने की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें खुले आसमान के नीचे इंतजार करना पड़ता है।
अतिक्रमण और अव्यवस्था से बिगड़ी स्थिति
बस स्टैंड परिसर में अतिक्रमण की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऑटो और ई-रिक्शा चालकों द्वारा अनियंत्रित तरीके से वाहन खड़े किए जाने के कारण यात्रियों के आवागमन में बाधा उत्पन्न होती है। कई बार बसों के प्रवेश और निकास में भी परेशानी होती है। इसके अलावा परिसर में फैली गंदगी और बदबू यात्रियों को परेशान कर रही है।
बारिश में दलदल में तब्दील हो जाता है परिसर
स्थानीय लोगों का कहना है कि हल्की बारिश होने पर भी बस स्टैंड परिसर में जलजमाव और कीचड़ की समस्या उत्पन्न हो जाती है। साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण स्थिति और गंभीर हो जाती है। यात्रियों को कीचड़ और गंदगी के बीच होकर बसों तक पहुंचना पड़ता है, जिससे खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को काफी परेशानी होती है।
बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव
खड़गपुर बस स्टैंड से राजधानी पटना, पूर्णिया, बेगूसराय, खगड़िया, हजारीबाग, देवघर, मुंगेर, जमुई और अमरपुर समेत कई महत्वपूर्ण शहरों के लिए बसों का परिचालन होता है। इसके बावजूद यहां फायर सेफ्टी उपकरण, प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) बॉक्स, शुद्ध पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। यात्रियों के साथ-साथ बस कर्मियों को भी इससे काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
प्रतिदिन हजारों यात्रियों का होता है आवागमन
आंबेडकर चौक स्थित इस बस स्टैंड से प्रतिदिन लगभग आठ हजार से अधिक यात्री विभिन्न गंतव्यों के लिए यात्रा करते हैं। इसके अलावा करीब डेढ़ सौ से दो सौ ऑटो और ई-रिक्शा भी यहीं से संचालित होते हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही के बावजूद बस स्टैंड की स्थिति उपेक्षा का शिकार बनी हुई है।
आमदनी के बावजूद विकास कार्य ठप
स्थानीय लोगों का कहना है कि बस स्टैंड से प्रतिदिन 25 से 30 हजार रुपये तक की आय होती है। इसके बावजूद न तो भवनों की मरम्मत कराई गई और न ही यात्रियों के लिए आवश्यक सुविधाओं का विस्तार किया गया। लोगों का आरोप है कि लाखों रुपये के राजस्व के बावजूद बस स्टैंड के विकास की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
यात्रियों और कर्मियों ने उठाई सुधार की मांग
बस स्टैंड से जुड़े कर्मचारी, चालक, परिचालक और यात्री वर्षों से सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बदहाल व्यवस्था के कारण यात्रा और कार्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। लोगों ने जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और बिहार राज्य पथ परिवहन निगम से बस स्टैंड का शीघ्र जीर्णोद्धार कराने, साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा यात्रियों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द ही इस दिशा में कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले बरसात के मौसम में यात्रियों की परेशानियां और बढ़ जाएंगी। अब लोगों की नजर प्रशासन और परिवहन विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
रिपोर्ट: दैनिक बिहार पत्रिका, मुंगेर
Author: दैनिक बिहार पत्रिका
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