
सरकारी-रैयती भूमि से लेकर सड़क, रेल और पानी की उपलब्धता तक का बनेगा पूरा ब्योरा; डीएम ने अंचल अधिकारियों को उपयुक्त जमीन चिन्हित कर समेकित विवरण तैयार करने का दिया निर्देश
बांका:- जिले में किसी बड़ी विकास परियोजना की स्वीकृति मिलने के बाद जमीन की तलाश में समय बर्बाद न हो, इसके लिए प्रशासन अब पहले से उपयुक्त भूमि का ‘लैंड बैंक’ तैयार करेगा। इसमें अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्ध सरकारी और अन्य संभावित भूमि का समेकित विवरण रखा जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर परियोजना की प्रकृति के अनुसार जमीन का चयन तेजी से किया जा सके। सोमवार को जिला पदाधिकारी अंशुल अग्रवाल की अध्यक्षता में अंचल अधिकारियों के साथ हुई बैठक में विभिन्न विकासात्मक एवं महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए भूमि की उपलब्धता और चयन की समीक्षा की गई। डीएम ने जमीन चिन्हित करने से लेकर अधिग्रहण तक की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब रोकने के निर्देश दिए।
केवल खाली जमीन देखना पर्याप्त नहीं, कई मानकों पर होगी पड़ताल
अंचल अधिकारियों को स्पष्ट किया गया कि किसी परियोजना के लिए केवल जमीन उपलब्ध होना ही चयन का आधार नहीं होगा। प्रस्तावित भूमि की प्रकृति, वन क्षेत्र की स्थिति, सरकारी एवं रैयती भूमि का हिस्सा और उससे प्रभावित होने वाले परिवारों की संख्या सहित कई बिंदुओं की जानकारी पहले से जुटानी होगी। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के परिवारों की संख्या का अलग विवरण भी तैयार करने का निर्देश दिया गया है। इसका उद्देश्य भूमि चयन के शुरुआती चरण में ही आवश्यक तथ्य सामने रखना है।
सड़क-रेल संपर्क और पानी भी तय करेंगे जमीन की उपयोगिता
बड़ी परियोजनाओं के लिए जमीन चिन्हित करते समय उसकी भौगोलिक स्थिति और बुनियादी सुविधाओं को भी महत्व दिया जाएगा। डीएम ने रेलमार्ग और सड़क मार्ग की उपलब्धता के साथ पानी की उपलब्धता को भी ध्यान में रखने का निर्देश दिया।
यानी प्रशासन ऐसी जमीनों का ब्योरा तैयार करना चाहता है, जिनके संबंध में परियोजना आने के बाद बुनियादी जरूरतों का आकलन नए सिरे से न करना पड़े। चिन्हित भूमि से संबंधित आवश्यक विवरण और प्रतिवेदन भी तैयार किए जाएंगे।
जिले की उपयुक्त जमीनों का बनेगा समेकित रिकॉर्ड
बैठक में वर्तमान में विभिन्न परियोजनाओं के लिए उपलब्ध भूमि की समीक्षा के साथ दूसरी संभावित जमीनों पर भी चर्चा हुई। सभी बड़ी एवं महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए उपलब्ध और उपयुक्त भूमि का समेकित विवरण तैयार कर लैंड बैंक का निर्माण एवं संधारण करने को कहा गया है। इस व्यवस्था का फायदा यह होगा कि भविष्य में किसी नई बड़ी परियोजना के लिए भूमि की जरूरत पड़ने पर प्रशासन के पास संभावित विकल्पों का रिकॉर्ड पहले से मौजूद रहेगा। परियोजना की जरूरत के आधार पर उसी विवरण से उपयुक्त जमीन का चयन किया जा सकेगा।
जमीन चयन के बाद अधिग्रहण में भी नहीं चलेगी सुस्ती
डीएम ने भूमि चयन के बाद अधिग्रहण की प्रक्रिया को भी समयबद्ध रखने का निर्देश दिया। संबंधित मामलों में आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई और प्रक्रियाओं को तय समय में पूरा करने पर जोर दिया गया है। प्रशासन की यह कवायद सफल रही तो जिले में बड़ी परियोजनाओं के लिए जमीन की पहचान शून्य से शुरू करने के बजाय पहले से तैयार रिकॉर्ड के आधार पर हो सकेगी। इससे भूमि चयन और अधिग्रहण में लगने वाला समय कम करने तथा परियोजनाओं को अनावश्यक देरी से बचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।










