
मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता की धीमी प्रगति बढ़ाने के लिए 22 से 25 सितंबर तक प्रखंडवार बैठक; पहले दिन चांदन, कटोरिया और बेलहर की टीम को मिली जिम्मेदारी
बांका:- इंटरमीडिएट या स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार की तलाश कर रहे पात्र युवा केवल जानकारी के अभाव में मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना से वंचित न रहें, इसके लिए अब शिक्षा सेवक और तालीमी मरकज से जुड़े कर्मियों को फील्ड स्तर पर जिम्मेदारी दी जा रही है। प्रत्येक को कम से कम 10 आवेदन कराने का लक्ष्य दिया गया है। जिला पदाधिकारी अंशुल अग्रवाल के निर्देश के आलोक में मंगलवार को जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र (DRCC), बांका में जिला योजना पदाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसका उद्देश्य मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना की अपेक्षित प्रगति बढ़ाना और पात्र युवाओं को सीधे डीआरसीसी से जोड़ना रहा।
22 से 25 सितंबर तक प्रखंडवार चलेगी बैठक
इस अभियान के लिए सभी प्रखंडों को एक साथ बुलाने के बजाय 22 से 25 सितंबर तक अलग-अलग प्रखंडों के साथ बैठक आयोजित की जा रही है। मंगलवार को चांदन, कटोरिया और बेलहर प्रखंड के शिक्षा सेवक, तालीमी मरकज एवं KRP के साथ योजना की समीक्षा और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में उन्हें योजना की पात्रता और लाभ की जानकारी देकर अपने कार्यक्षेत्र में योग्य बेरोजगार युवक-युवतियों तक पहुंचने को कहा गया।
हर कर्मी को कम से कम 10 आवेदन का लक्ष्य
जिला योजना पदाधिकारी ने शिक्षा सेवक एवं तालीमी मरकज से जुड़े कर्मियों को कम से कम 10 आवेदन कराने का लक्ष्य निर्धारित किया। साथ ही कहा गया कि इसके लिए अगले महीने का इंतजार नहीं किया जाए, बल्कि वर्तमान माह से ही पात्र अभ्यर्थियों को चिन्हित कर डीआरसीसी भेजना शुरू करें। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल योजना का प्रचार करना नहीं, बल्कि पात्र युवक-युवतियों को आवेदन की प्रक्रिया तक पहुंचाकर योजना से आच्छादित कराना है।
रोजगार तलाशने के दौरान ₹1,000 प्रतिमाह का प्रावधान
डीआरसीसी के प्रबंधक ने बताया कि मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना के तहत निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले 20 से 25 वर्ष आयु वर्ग के इंटरमीडिएट अथवा स्नातक उत्तीर्ण बेरोजगार युवक-युवतियों को रोजगार की तलाश के दौरान आर्थिक सहायता दी जाती है। योजना में पात्र लाभार्थियों को ₹1,000 प्रतिमाह अधिकतम दो वर्षों तक स्वयं सहायता भत्ता दिए जाने का प्रावधान है।
भत्ते के साथ तीन महीने का कौशल प्रशिक्षण
पात्र युवाओं को आर्थिक सहायता के साथ तीन माह के कुशल युवा कार्यक्रम (KYP) से भी जोड़ा जाता है। इसके माध्यम से युवाओं को रोजगार की तैयारी के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने का अवसर मिलता है। प्रशासन का फोकस अब ऐसे युवाओं तक पहुंचने पर है, जिन्होंने पढ़ाई तो पूरी कर ली है लेकिन योजना की जानकारी या आवेदन प्रक्रिया तक पहुंच नहीं होने के कारण इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
*प्रचार से आगे अब आवेदन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी*
बैठक में तय लक्ष्य से स्पष्ट है कि स्वयं सहायता भत्ता योजना में अब केवल जागरूकता कार्यक्रमों के बजाय पात्र युवा की पहचान से लेकर उसे DRCC तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। बैठक में जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र के प्रबंधक, सहायक प्रबंधक, सिंगल विंडो ऑपरेटर सहित संबंधित कर्मी मौजूद रहे। प्रखंडवार बैठकों के बाद अब नजर इस बात पर होगी कि निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कितने पात्र बेरोजगार युवाओं को योजना से जोड़ा जाता है।


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