
रजौन थाना कांड में तीन आरोपियों को सजा; दो अन्य दोषियों को पांच-पांच साल की कैद और जुर्माना
बांका:- जिले में दुष्कर्म एवं आपराधिक मामले में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को अलग-अलग धाराओं में दोषी करार दिया है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम, बांका की अदालत ने 14 अक्टूबर 2026 को रजौन थाना कांड संख्या 178/23, सत्रवाद संख्या 518/23 में अपना निर्णय सुनाया। फैसले के तहत दिवाकर पासवान को दुष्कर्म सहित संबंधित अपराध में आजीवन कारावास और आर्थिक दंड की सजा दी गई, जबकि दो अन्य दोषियों को पांच-पांच वर्ष के कारावास और जुर्माने से दंडित किया गया।
दिवाकर पासवान को आजीवन कारावास
न्यायालय के फैसले के अनुसार, दिवाकर पासवान, पिता भट्ठी, को भारतीय दंड विधान की धारा 376/34 के तहत आजीवन कारावास तथा 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। इसके अतिरिक्त, धारा 458/34 के तहत उसे पांच वर्ष के कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया है। निर्धारित अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में इस धारा के तहत छह महीने के अतिरिक्त कारावास का प्रावधान बताया गया है। यह फैसला मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर सुनाया गया। न्यायालय ने संबंधित धाराओं के तहत आरोपों पर विचार करने के बाद सजा निर्धारित की।
दो अन्य दोषियों को पांच-पांच साल की सजा
इसी मामले में जब्बा रजक उर्फ मनीष कुमार, पिता बुद्दन रजक, तथा भीखो उर्फ भिखारी को भारतीय दंड विधान की धारा 458/34 के तहत दोषी पाया गया। अदालत ने दोनों को पांच-पांच वर्ष के कारावास और 20-20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड का भुगतान नहीं करने पर दोनों को तीन-तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। तीनों दोषी टेकनी गांव, थाना रजौन, जिला बांका के निवासी बताए गए हैं। अदालत के निर्णय से मामले में आरोपियों की आपराधिक जवाबदेही तय हुई है।
वैज्ञानिक अनुसंधान और गवाही की अहम भूमिका
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस अधीक्षक अमितेश कुमार के निर्देशन में मामले की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। अभियोजन पदाधिकारी सुबोध कुमार मिश्रा द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत वैज्ञानिक अनुसंधान, साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने अपना मामला रखा। इन्हीं तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपियों के विरुद्ध फैसला सुनाया। इस मामले का निर्णय आपराधिक मामलों में अनुसंधान, साक्ष्य संकलन और न्यायालय में प्रभावी अभियोजन की भूमिका को रेखांकित करता है। हालांकि, किसी भी मामले में दोष और सजा का अंतिम निर्धारण न्यायालय के निर्णय के अनुसार ही माना जाता है। रजौन थाना कांड संख्या 178/23 में आए इस फैसले के साथ तीनों दोषियों को संबंधित धाराओं के तहत दंडित किया गया है। दिवाकर पासवान को आजीवन कारावास, जबकि जब्बा रजक उर्फ मनीष कुमार और भीखो उर्फ भिखारी को पांच-पांच वर्ष की कैद की सजा सुनाई गई है।









