
बांका। जिले में सहकारिता व्यवस्था को मजबूत बनाने, किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और सरकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचाने को लेकर जिला प्रशासन सक्रिय है। इसी कड़ी में जिला पदाधिकारी अंशुल अग्रवाल की अध्यक्षता में सहकारिता विभाग से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए बैठक आयोजित की गई। बैठक में पैक्स कंप्यूटरीकरण, आदर्श पैक्स के चयन, किसान उत्पादक संगठनों यानी एफपीओ, कॉमन सर्विस सेंटर, उर्वरक व्यवसाय, गोदाम निर्माण और धान अधिप्राप्ति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। बैठक में जिला सहकारिता पदाधिकारी ने पैक्स कंप्यूटरीकरण योजना की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि जिले में चयनित कुल 105 पैक्सों में से 101 पैक्सों का सिस्टम ऑडिट पूरा कर लिया गया है। इस पर जिला पदाधिकारी ने योजनाओं के शेष कार्यों को भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ाने और सहकारी संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
आदर्श पैक्स से मजबूत होगी सहकारिता व्यवस्था
आदर्श पैक्स के चयन को लेकर जिला पदाधिकारी ने सभी प्रखंडों में कम-से-कम दो पैक्सों को आदर्श पैक्स के रूप में चयनित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इन पैक्सों के माध्यम से अधिकाधिक सहकारी योजनाओं का संचालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारिता संस्थाएं अधिक उपयोगी बन सकें और किसानों को विभिन्न सेवाओं का लाभ मिल सके।

एफपीओ के कारोबार पर प्रशासन का ध्यान
बैठक में किसान उत्पादक संगठनों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। जिला सहकारिता पदाधिकारी ने बताया कि बांका जिले में संचालित दो एफपीओ में से भोरसार एफपीओ कारोबार कर रहा है, जबकि रजौन एफपीओ ने अब तक अपना कारोबार शुरू नहीं किया है। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जिला पदाधिकारी ने रजौन एफपीओ के संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। साथ ही, कॉमन सर्विस सेंटरों में लेन-देन की संख्या बढ़ाने पर भी बल दिया गया, ताकि इन केंद्रों की उपयोगिता और गतिविधियों में वृद्धि हो सके।
59 पैक्सों को लाइसेंस, लेकिन पॉस मशीन की कमी से रुका उर्वरक कारोबार
उर्वरक व्यवसाय की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले के 59 पैक्सों को उर्वरक अनुज्ञप्ति मिल चुकी है। हालांकि, पॉस मशीन उपलब्ध नहीं होने के कारण इन पैक्सों में उर्वरक व्यवसाय शुरू नहीं हो सका है। इस पर जिला पदाधिकारी ने जिला सहकारिता पदाधिकारी को संबंधित पैक्सों के लिए पॉस मशीन उपलब्ध कराने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इससे लाइसेंस प्राप्त पैक्सों में उर्वरक बिक्री शुरू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
गोदाम निर्माण और धान अधिप्राप्ति पर भी निर्देश
गोदाम निर्माण योजना की समीक्षा के दौरान प्रबंध निदेशक, डीसीसीबी, भागलपुर के प्रतिनिधि ने बताया कि पूर्व में दो पैक्सों को विश्व की बड़ी अन्न भंडार योजना के अंतर्गत चयनित किया गया था। इनमें कुडरो पैक्स वर्तमान में निलंबित है, जबकि रजौन पैक्स को पांच हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम के निर्माण के लिए चुना गया था। जिला पदाधिकारी ने इस विषय पर कार्ययोजना तैयार कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। बैठक के अंत में धान अधिप्राप्ति वर्ष 2026-27 को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए। जिला पदाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से विभाग द्वारा जारी मार्गदर्शिका के अनुरूप आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही लंबित कार्यों का शीघ्र निष्पादन, योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति प्राथमिकता के आधार पर करने का निर्देश दिया। अब निगाहें निर्देशों के धरातल पर क्रियान्वयन पर हैं। पैक्सों का कंप्यूटरीकरण, आदर्श पैक्सों का चयन, उर्वरक कारोबार की शुरुआत और गोदाम निर्माण जैसे कार्यों में प्रगति से जिले की सहकारिता व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।


BANKA NEWS: बांका में सहकारिता








