
बौंसी/बांका। बिजली चोरी के खिलाफ विद्युत विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। बौंसी थाना क्षेत्र के बगडुम्बा गांव में जांच के दौरान बिजली चोरी के दो अलग-अलग मामले सामने आने का दावा किया गया है। विभागीय जांच में एक परिसर में एलटी लाइन में सीधे तार जोड़कर बिजली इस्तेमाल करने, जबकि दूसरे परिसर में मीटर को बाइपास कर विद्युत ऊर्जा का उपयोग करने की बात कही गई है। इन मामलों में साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड को कुल 23 हजार 666 रुपये की आर्थिक क्षति होने का आकलन किया गया है। प्राप्त विभागीय आवेदन के अनुसार, गुप्त सूचना के आधार पर बिजली चोरी की जांच के लिए एक छापेमारी दल गठित किया गया था। इस दल में बौंसी विद्युत आपूर्ति प्रशाखा के कनीय विद्युत अभियंता राहुल कुमार और मानवबल सुनील कुमार शामिल थे। टीम ने 23 अक्टूबर 2026 को बगडुम्बा गांव में अलग-अलग परिसरों का निरीक्षण किया।
पहला मामला: एलटी लाइन में सीधे तार जोड़ने का आरोप
विभागीय आवेदन में बताया गया है कि 23 अक्टूबर को दोपहर करीब 3 बजकर 10 मिनट पर अजित कुमार पासवान, पिता स्वर्गीय बोधी पासवान, निवासी बगडुम्बा के परिसर की जांच की गई। इस दौरान आरोप लगाया गया कि एलटी लाइन में सीधे टांका लगाकर घरेलू श्रेणी DS-IID में 78 वाट विद्युत ऊर्जा का अनधिकृत उपयोग किया जा रहा था। विभाग ने इस मामले में कंपनी को करीब 11 हजार 767 रुपये की आर्थिक क्षति होने का आकलन किया है।
दूसरा मामला: मीटर बाइपास कर बिजली इस्तेमाल करने का आरोप
वहीं, उसी दिन दोपहर करीब 3 बजकर 35 मिनट पर नरेश दास, पिता स्वर्गीय कालदेव दास, निवासी बगडुम्बा के परिसर का निरीक्षण किया गया। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक, यहां मीटर को बाइपास कर घरेलू श्रेणी DS-IID में 225 वाट विद्युत ऊर्जा का उपयोग किया जा रहा था। इस मामले में कंपनी को करीब 11 हजार 899 रुपये की आर्थिक क्षति होने का अनुमान लगाया गया है। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि नरेश दास के नाम से परिसर में बिजली का एक कनेक्शन मौजूद है, जिसका उपभोक्ता संख्या 23510053843 है। इसके बावजूद मीटर को बाइपास कर बिजली इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया गया है।
विद्युत अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग
दोनों मामलों को लेकर विभाग की ओर से भारतीय विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 135 और अन्य संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया गया है। बिजली चोरी से न केवल विद्युत कंपनी को आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि इससे बिजली व्यवस्था और ईमानदारी से बिल का भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल, दोनों मामलों में विभागीय आवेदन में लगाए गए आरोपों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया की जानी है। आरोपों की पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों की कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण नियमानुसार जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।







