
पटना: बिहार में निजी विद्यालयों से जुड़ी समस्याओं और मांगों को लेकर शिक्षा विभाग के स्तर पर पहल की उम्मीद जगी है। प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन (PSACWA) के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद शमायल अहमद ने बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी से उनके सरकारी आवास पर विशेष मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रदेशभर के एसोसिएशन से जुड़े निजी विद्यालयों की समस्याओं को विस्तार से रखते हुए 10 सूत्री मांग-पत्र सौंपा। एसोसिएशन के अनुसार, शिक्षा मंत्री ने इन मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए समस्याओं के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। मुलाकात के दौरान सैयद शमायल अहमद ने निजी विद्यालयों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद ये विद्यालय लाखों बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में योगदान दे रहे हैं। साथ ही, कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में भी निजी विद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों की व्यावहारिक समस्याओं का समयबद्ध समाधान होने से राज्य की शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सकता है।
आरटीई भुगतान और नामांकन प्रक्रिया पर विशेष जोर
एसोसिएशन की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांग शिक्षा का अधिकार यानी आरटीई के तहत लंबित प्रतिपूर्ति राशि का शीघ्र और एकमुश्त भुगतान करने की है। इसके साथ ही प्रति विद्यार्थी प्रतिपूर्ति दर में समुचित वृद्धि की मांग भी रखी गई। एसोसिएशन ने सत्र 2019–20 से लंबित आरटीई प्रविष्टियों के लिए पोर्टल दोबारा खोलने और नामांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। ज्ञापन में प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया, ताकि नामांकन से संबंधित समस्याओं का समय पर समाधान हो सके। एसोसिएशन का मानना है कि आरटीई से जुड़ी प्रक्रियाओं को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने से विद्यालयों तथा विद्यार्थियों, दोनों को लाभ मिल सकता है।
मान्यता, पोर्टल और परिवहन व्यवस्था में सुधार की मांग
दस सूत्री मांग-पत्र में निजी विद्यालयों की मान्यता और नवीनीकरण की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी तथा समयबद्ध बनाने का मुद्दा भी शामिल है। इसके अतिरिक्त जिला और राज्य स्तर पर सिंगल विंडो सिस्टम स्थापित करने की मांग की गई, जिससे विद्यालयों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की परेशानी कम हो। एसोसिएशन ने विभिन्न शिक्षा पोर्टलों को एकीकृत करने और जिला स्तर पर तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई। वहीं, कक्षा दूसरी से आठवीं तक ऑनलाइन नामांकन और विद्यार्थियों के विवरण में सुधार की सुविधा देने की मांग भी उठाई गई। स्कूल बसों के संचालन को लेकर अलग, सुरक्षित और व्यावहारिक परिवहन नीति बनाने का प्रस्ताव भी ज्ञापन में शामिल है। इसके साथ ही निजी विद्यालयों की समस्याओं और सुझावों पर नियमित विचार-विमर्श के लिए प्रतिनिधियों की स्थायी राज्यस्तरीय परामर्श समिति गठित करने की मांग की गई।
संवाद से समाधान की उम्मीद
मुलाकात के बाद सैयद शमायल अहमद ने शिक्षा मंत्री के सकारात्मक रुख का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मंत्री ने सभी विषयों को गंभीरता से सुना और समस्याओं के अतिशीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि इस संवाद से निजी विद्यालयों की लंबित समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस पहल का रास्ता खुलेगा। सैयद शमायल अहमद ने कहा कि निजी विद्यालयों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा एसोसिएशन की प्राथमिकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और निजी विद्यालयों के बीच सार्थक समन्वय से शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। फिलहाल, निजी विद्यालयों की इन दस मांगों पर आगे होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। विशेष रूप से आरटीई की लंबित राशि, प्रतिपूर्ति दर, मान्यता प्रक्रिया और परिवहन नीति से जुड़े मुद्दों पर निर्णय का इंतजार रहेगा।


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