
पटना: कैंसर का नाम सुनते ही मरीज और उसके परिवार के मन में कई तरह की चिंताएं पैदा हो जाती हैं। इलाज, जीवन की सुरक्षा और भविष्य की अनिश्चितता के बीच एक सवाल यह भी होता है कि क्या कैंसर से स्वस्थ होने के बाद संतान सुख प्राप्त करना संभव होगा? चिकित्सा विज्ञान में विकसित हो रही ओंको-फर्टिलिटी तकनीक ऐसे मरीजों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। इस तकनीक के माध्यम से कैंसर के इलाज से पहले, इलाज के दौरान या इलाज के बाद प्रजनन क्षमता को सुरक्षित रखने के विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। पटना में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन यानी आईएमए और पीओजीएस की ओर से आयोजित ‘पिंक वॉक’ ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस कार्यक्रम में डॉ. संजीव कुमार, डॉ. कुमारी अनुराग और एम्ब्रायोलॉजिस्ट डॉ. पंकज कुमार ने कैंसर के प्रति जागरूकता के साथ प्रजनन क्षमता संरक्षण के महत्व पर जानकारी साझा की। डॉ. संजीव कुमार और डॉ. कुमारी अनुराग ने बताया कि ओंको-फर्टिलिटी कैंसर विशेषज्ञों और प्रजनन चिकित्सा विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों का बेहतर उदाहरण है। आज कैंसर के प्रति जागरूकता, नियमित स्क्रीनिंग और समय पर जांच से बीमारी की शुरुआती अवस्था में पहचान संभव हो सकती है। उचित उपचार से कई प्रकार के कैंसर में मरीजों के स्वस्थ होने की संभावनाएं बेहतर हुई हैं और जीवित रहने की अवधि में भी सुधार हुआ है। विशेषज्ञों ने बताया कि कैंसर केवल अधिक उम्र के लोगों तक सीमित नहीं है। कई बार यह बीमारी कम उम्र में या उस समय भी हो सकती है, जब व्यक्ति परिवार शुरू करने की योजना बना रहा होता है। कैंसर के उपचार में कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और सर्जरी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन कुछ उपचारों का असर महिलाओं की अंडेदानी और बच्चेदानी तथा पुरुषों के अंडकोष और प्रजनन क्षमता पर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में कैंसर का उपचार शुरू करने से पहले प्रजनन क्षमता संरक्षण के विकल्पों पर चर्चा करना उपयोगी हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, मरीज की उम्र, कैंसर के प्रकार, बीमारी की अवस्था और प्रस्तावित उपचार को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त विकल्प तय किया जाता है। हालांकि, हर मरीज के लिए एक ही तरीका उपयुक्त नहीं होता और कैंसर के इलाज में अनावश्यक देरी किए बिना निर्णय लेना जरूरी है।
क्रायोप्रिजर्वेशन से भविष्य के लिए सुरक्षित रखे जा सकते हैं प्रजनन कोशिकाएं
एम्ब्रायोलॉजिस्ट डॉ. पंकज कुमार ने क्रायोप्रिजर्वेशन तकनीक की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस प्रक्रिया में भ्रूण, शुक्राणु और अंडाणु को लगभग माइनस 196 डिग्री सेल्सियस तापमान पर विशेष परिस्थितियों में सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे भविष्य में जरूरत के अनुसार सहायक प्रजनन तकनीकों, जैसे आईवीएफ, की मदद से संतान प्राप्ति का विकल्प उपलब्ध हो सकता है। उन्होंने बताया कि कुछ मरीजों में विशेष हार्मोनल उपचार भी उपयोगी हो सकता है, जिससे प्रजनन अंगों पर कैंसर के उपचार के संभावित दुष्प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, ऐसे विकल्पों का चयन मरीज की स्थिति और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही किया जाता है।
फर्टिलिटी प्रिजर्विंग सर्जरी भी महत्वपूर्ण विकल्प
डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि चुनिंदा मामलों में फर्टिलिटी प्रिजर्विंग सर्जरी के माध्यम से प्रजनन क्षमता को सुरक्षित रखने का प्रयास किया जा सकता है। अंडेदानी में होने वाले कुछ ट्यूमर, जैसे जर्म-सेल ट्यूमर, सेक्स-कॉर्ड ट्यूमर और बॉर्डरलाइन ट्यूमर, में मरीज की स्थिति के अनुसार इस तरह की सर्जरी उपयोगी हो सकती है। इसमें बीमारी के प्रभावी उपचार के साथ भविष्य में संतान प्राप्ति की संभावना को भी ध्यान में रखा जाता है। डॉ. कुमारी अनुराग ने कहा कि आधुनिक सहायक प्रजनन तकनीक कैंसर के उपचार से पहले, उपचार के दौरान या उपचार के बाद कुछ मरीजों के लिए उपयोगी विकल्प प्रदान कर सकती है। इसलिए मरीजों और उनके परिजनों को इस विषय पर समय रहते जानकारी प्राप्त करनी चाहिए और संबंधित विशेषज्ञों से परामर्श लेना चाहिए।
जागरूकता ही बेहतर निर्णय की पहली सीढ़ी
कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा कि कैंसर के उपचार के साथ मरीज के भविष्य और जीवन की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है। ओंको-फर्टिलिटी चिकित्सा का ऐसा क्षेत्र है, जो कैंसर से जूझ रहे लोगों को प्रजनन क्षमता सुरक्षित रखने के संभावित विकल्पों से परिचित कराता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कैंसर का निदान होने पर घबराने के बजाय समय पर उपचार शुरू करना और जरूरत पड़ने पर प्रजनन विशेषज्ञ से जल्द सलाह लेना महत्वपूर्ण है। सही जानकारी, व्यक्तिगत उपचार योजना और विशेषज्ञों के समन्वय से कुछ मरीजों के लिए भविष्य में माता-पिता बनने की उम्मीद सुरक्षित रखी जा सकती है।


BIHAR NEWS: कैंसर के इलाज





