
डॉ. नरेंद्र प्रसाद सिंह और बंशीधर ब्रजवासी को दी जीत की बधाई, जनप्रतिनिधि के रूप में बेहतर कार्य करने की शुभकामनाएं
पटना। बिहार विधान परिषद के तिरहुत शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में दोनों क्षेत्रों से नवनिर्वाचित विधान पार्षदों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से पटना स्थित लोक सेवक आवास में शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने दोनों जनप्रतिनिधियों को उनकी चुनावी सफलता पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात करने वालों में तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित डॉ. नरेंद्र प्रसाद सिंह और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विजयी बंशीधर ब्रजवासी शामिल रहे। मुख्यमंत्री ने दोनों को जीत की बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल कार्यकाल की कामना की।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी की जीत
तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी डॉ. नरेंद्र प्रसाद सिंह ने चुनाव में जीत दर्ज की है। मुख्यमंत्री ने उनकी सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे जनता के विश्वास और समर्थन का प्रतीक बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि डॉ. सिंह शिक्षक समुदाय की अपेक्षाओं और समस्याओं को सदन में प्रभावी ढंग से उठाएंगे।

स्नातक क्षेत्र से बंशीधर ब्रजवासी लगातार दूसरी बार निर्वाचित
वहीं, तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार बंशीधर ब्रजवासी ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल कर विधान परिषद में अपनी जगह बनाई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उन्हें भी इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और आगे की जिम्मेदारियों के सफल निर्वहन के लिए शुभकामनाएं दीं।
मुलाकात के राजनीतिक और जनप्रतिनिधित्व के मायने
दोनों नवनिर्वाचित विधान पार्षदों की मुख्यमंत्री से हुई इस मुलाकात को चुनाव के बाद की शिष्टाचार भेंट के रूप में देखा जा रहा है। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से आए जनप्रतिनिधियों के सामने अब अपने-अपने मतदाता वर्ग की अपेक्षाओं को सदन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी होगी। गौरतलब है कि डॉ. नरेंद्र प्रसाद सिंह ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की है, जबकि बंशीधर ब्रजवासी ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लगातार दूसरी बार सफलता प्राप्त की है। मुख्यमंत्री की ओर से दी गई बधाई के साथ यह मुलाकात संपन्न हुई। अब क्षेत्र के शिक्षकों और स्नातकों की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि नवनिर्वाचित विधान पार्षद अपने कार्यकाल में शिक्षा, शिक्षक हितों और स्नातक मतदाताओं से जुड़े मुद्दों को किस तरह प्राथमिकता देते हैं।








