*डिस्चार्ज के दौरान मेडिकल रिपोर्ट और इलाज के कागजात मांगने पर हुआ था विवाद, पुलिस ने शुरू की जांच*
खगड़िया/परबत्ता थाना क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल में नवजात बच्ची के इलाज के दौरान कथित अनियमितता और विवाद का मामला अब पुलिस तक पहुंच गया है। गुरुवार को अस्पताल में हुए हंगामे की घटना की जांच करने शुक्रवार को स्थानीय पुलिस अस्पताल पहुंची। इस दौरान पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया और पीड़ित बच्ची के परिजनों द्वारा थाने में दिए गए आवेदन के आधार पर मामले की छानबीन की।
जांच के लिए पहुंचे परबत्ता थाना के एसआई सुशील कुमार पांडेय ने बताया कि निजी अस्पताल में हुए हंगामे की घटना की जांच के लिए पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी। उन्होंने बताया कि इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से थाने में आवेदन दिया गया है। पुलिस सभी बिंदुओं पर जांच कर रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, बीते 27 अक्टूबर को प्रखंड क्षेत्र के बिठला गांव निवासी मनीष कुमार अपनी पत्नी कल्याणी कुमारी के साथ सुबह करीब 8:30 बजे अपनी नवजात बच्ची को लेकर उक्त निजी अस्पताल पहुंचे थे। परिजनों के मुताबिक, बच्ची में ऑक्सीजन की कमी होने के कारण उसे सुरक्षित उपचार के लिए एनआईसीयू में भर्ती कराया गया था।
आरोप है कि बच्ची को डिस्चार्ज कराने के दौरान जब परिजनों ने इलाज की स्थिति और उपचार से संबंधित जानकारी मांगी तथा मेडिकल रिपोर्ट, इलाज के कागजात और जमा की गई राशि की रसीद देने की मांग की, तो अस्पताल के डॉक्टर कथित तौर पर आगबबूला हो गए। इसके बाद अस्पताल परिसर में दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया और हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई।
परिजनों ने इलाज से संबंधित आवश्यक दस्तावेज नहीं देने और कथित दुर्व्यवहार को लेकर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। वहीं, अस्पताल प्रबंधन की ओर से भी आवेदन दिए जाने की बात सामने आई है।
फिलहाल पुलिस की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। नवजात बच्ची के इलाज से जुड़े इस विवाद ने निजी अस्पतालों में मरीजों के परिजनों को उपचार संबंधी जानकारी और मेडिकल दस्तावेज उपलब्ध कराने के सवाल को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
*दैनिक बिहार पत्रिका परबत्ता संवाददाता गुरुदेव कुमार।*








