
पटना। पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाने की दिशा में बिहार में एक नई पहल की तैयारी है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बिहार विधान मंडल परिसर स्थित नर्सरी को गोद लेकर उसके संरक्षण, संवर्धन और विकास की जिम्मेदारी निभाने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य परिसर में हरित वातावरण को बढ़ावा देने के साथ लोगों में प्रकृति के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51क में नागरिकों के मूल कर्तव्यों का उल्लेख है। इसके तहत प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह वन, झील, नदी और वन्यजीवों सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा एवं संवर्धन करे तथा सभी जीवों के प्रति करुणा का भाव रखे। कृषि मंत्री की यह पहल इसी संवैधानिक भावना और नागरिक दायित्व को व्यवहार में उतारने का प्रयास है।
दीघा मालदह से आगे बढ़ेगी नर्सरी की पहचान
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि फिलहाल बिहार विधान मंडल परिसर की इस नर्सरी में आम की प्रसिद्ध ‘दीघा मालदह’ किस्म के पौधों का संवर्धन किया जा रहा है। अब इस नर्सरी का दायरा बढ़ाया जाएगा। यहां विभिन्न प्रजातियों के फलदार, छायादार और औषधीय पौधों के साथ आकर्षक फूलों के पौधे भी विकसित किए जाएंगे। इससे नर्सरी को एक विविधतापूर्ण और समृद्ध हरित केंद्र के रूप में तैयार करने का लक्ष्य है। पौधों की अलग-अलग प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन से परिसर की हरियाली बढ़ाने के साथ पर्यावरणीय संतुलन को प्रोत्साहन देने का प्रयास किया जाएगा।
प्रकृति संरक्षण को बताया सभ्यता और संस्कारों की पहचान
मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रकृति संरक्षण संबंधी विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रकृति की रक्षा केवल नैतिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हमारी सभ्यता, संस्कृति और संस्कारों की मूल भावना है। उनके अनुसार, प्रकृति के प्रति सम्मान और उसका संरक्षण ही मानवता के कल्याण तथा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और सुखद भविष्य का आधार है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को सिर्फ व्यक्तिगत जिम्मेदारी मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। जब जनप्रतिनिधि, अधिकारी, बुद्धिजीवी और आम नागरिक मिलकर प्रकृति के संरक्षण का संकल्प लेंगे, तभी यह प्रयास व्यापक जन-अभियान का रूप ले सकेगा।
नर्सरी गोद लेने के लिए किया आह्वान
कृषि मंत्री ने प्रकृति प्रेमी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और बुद्धिजीवियों से अपील की कि वे भी अपने स्तर पर नर्सरियों को गोद लेकर उनके संरक्षण, संवर्धन और विकास की जिम्मेदारी उठाएं। उन्होंने कहा कि पौधे लगाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी उनकी देखभाल और नियमित संरक्षण भी है। इस पहल के माध्यम से नर्सरी के विकास के साथ पर्यावरण के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी को मजबूत करने का संदेश दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को प्रकृति से जोड़ना और हरित वातावरण के निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना है।
हरित भविष्य के लिए सामूहिक जिम्मेदारी जरूरी
बिहार विधान मंडल परिसर की नर्सरी को गोद लेने की यह पहल पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक प्रयास है। यदि इसी तरह अन्य संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों की नर्सरियों के संरक्षण की जिम्मेदारी भी समाज के अलग-अलग वर्ग उठाएं, तो हरियाली बढ़ाने की दिशा में व्यापक बदलाव संभव हो सकता है। संदेश साफ है—प्रकृति की रक्षा केवल विचारों से नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास, पौधों की देखभाल और सामूहिक भागीदारी से होगी। आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और हरित वातावरण देना आज की पीढ़ी की साझा जिम्मेदारी है।


BIHAR NEWS: बिहार विधान मंडल









