
‘सबका सम्मान–जीवन आसान’ के तहत डीएम अंशुल अग्रवाल ने सुनीं 33 लोगों की शिकायतें; जिला से प्रखंड स्तर तक अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य, कई मामलों का मौके पर समाधान
बांका:- सरकारी कार्यालय में अपनी समस्या लेकर पहुंचने वाले लोगों को अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण बार-बार चक्कर नहीं लगाना पड़े और शिकायत का समाधान समय पर हो, इसे लेकर बांका प्रशासन ने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया है। बिहार सरकार के सात निश्चय–3 के सातवें निश्चय ‘सबका सम्मान–जीवन आसान (Ease of Living)’ के तहत जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारियों को निर्धारित दोनों कार्य दिवसों में अपने कार्यालय में उपस्थित रहकर आम लोगों की समस्याएं सुनने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है।
इसी क्रम में शुक्रवार को जिला पदाधिकारी अंशुल अग्रवाल की अध्यक्षता में समाहरणालय के मिनी सभागार में जनसमस्याओं की सुनवाई की गई। इस दौरान कुल 33 आवेदकों ने अपनी समस्याओं और शिकायतों से संबंधित आवेदन डीएम के समक्ष प्रस्तुत किए।
शिकायत सुनी तो समाधान की प्रक्रिया भी शुरू
सुनवाई के दौरान डीएम ने एक-एक कर लोगों की समस्याओं को जाना और संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। जिन मामलों का तत्काल समाधान संभव था, उनमें मौके पर कार्रवाई की गई, जबकि शेष आवेदनों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निष्पादन की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि जनता से आवेदन प्राप्त करना ही प्रक्रिया का अंतिम चरण न बने, बल्कि शिकायत संबंधित विभाग तक पहुंचे और उसका समयबद्ध समाधान भी सुनिश्चित हो।
जिला से प्रखंड तक कार्यालयों में बैठे अधिकारी
इस व्यवस्था की खास बात यह रही कि केवल जिला मुख्यालय में डीएम द्वारा शिकायतें नहीं सुनी गईं। जिले के सभी जिला स्तरीय एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी भी अपने-अपने कार्यालयों में मौजूद रहे और नागरिकों की समस्याओं की सुनवाई की। इसका उद्देश्य लोगों को छोटी-बड़ी समस्याओं के लिए सीधे जिला मुख्यालय आने की मजबूरी से बचाना और जिस स्तर से समस्या जुड़ी है, उसी स्तर पर उसके समाधान की व्यवस्था मजबूत करना है।
तय दोनों दिन अनुपस्थित नहीं रहेंगे अधिकारी
डीएम अंशुल अग्रवाल ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि निर्धारित दोनों कार्य दिवसों में कार्यालय में उनकी उपस्थिति अनिवार्य रहेगी। इन दिनों आम नागरिक बिना अनावश्यक परेशानी के संबंधित अधिकारी के समक्ष अपनी समस्या रख सकें, इसे सुनिश्चित करने को कहा गया है। अधिकारियों को प्राप्त शिकायतों के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का भी निर्देश दिया गया। प्रशासन का उद्देश्य नागरिकों को ऐसी व्यवस्था उपलब्ध कराना है, जिसमें उन्हें अपनी समस्या लेकर अलग-अलग कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ें।
सुनवाई के साथ समाधान पर होगा असली फोकस
‘सबका सम्मान–जीवन आसान’ पहल के तहत प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बनाने पर जोर है। शिकायतों के समाधान में पारदर्शिता और समयबद्धता को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। शुक्रवार को पहुंचे 33 आवेदकों की सुनवाई के साथ प्रशासन ने अधिकारियों को संदेश दिया कि जनता की समस्या सुनना केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए—असली कसौटी शिकायत का समय पर और प्रभावी समाधान है।










