
दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन श्रद्धालुओं ने की उत्तम तप धर्म की आराधना; शांतिधारा कर शांति, समता और निर्मलता की मंगलकामना, 25 सितंबर को निकलेगी भव्य रथयात्रा
बौंसी/बांका:- इच्छाओं पर नियंत्रण, विकारों से दूरी और आत्मा की शुद्धि—इन्हीं भावनाओं के साथ मंगलवार को दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म की आराधना की गई। जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी की तप, कैवल्य ज्ञान एवं निर्वाण स्थली श्री मंदारगिरी दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र, बौंसी में सुबह से धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम चला और मंदिर परिसर मंत्रोच्चार व भक्ति के स्वरों से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से जिनेन्द्र प्रभु की पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में भगवान का अभिषेक और शांतिधारा संपन्न हुई। भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा पर पवित्र जल से अभिषेक कर श्रद्धालुओं ने आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक उन्नति की भावना व्यक्त की।
शांतिधारा के साथ समता और निर्मलता की कामना
अभिषेक के बाद हुई शांतिधारा में श्रद्धालुओं ने जीवन में शांति, समता और निर्मलता की मंगलकामना की। धार्मिक वातावरण के बीच देव-शास्त्र-गुरु पूजा, नवदेवता पूजा, सोलहकारण पूजा, दशलक्षण धर्म पूजा और चौबीसी पूजा सहित कुल नौ प्रकार की पूजा श्रद्धापूर्वक संपन्न की गई। पूजा-अर्चना, धार्मिक पाठ और मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने दशलक्षण धर्म के सातवें सोपान ‘उत्तम तप’ को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
तप का अर्थ केवल उपवास या शारीरिक कष्ट नहीं
क्षेत्र प्रबंधक पवन कुमार जैन ने उत्तम तप धर्म का महत्व बताते हुए कहा कि तप का उद्देश्य केवल शरीर को कष्ट देना नहीं है। इसका वास्तविक भाव इच्छाओं पर नियंत्रण, आत्मसंयम और कर्मों की निर्जरा की दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने बताया कि बाह्य तप के साथ आंतरिक तप के माध्यम से मनुष्य क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे विकारों पर विजय पाने का प्रयास करता है। अपनी इच्छाओं और आसक्तियों को नियंत्रित कर आत्मकल्याण की ओर बढ़ना ही उत्तम तप की मूल भावना है।
अब भगवान वासुपूज्य के निर्वाण महोत्सव की तैयारी
दशलक्षण महापर्व के धार्मिक अनुष्ठानों के बीच अब भगवान वासुपूज्य स्वामी के निर्वाण महोत्सव की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। 25 सितंबर, शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। रथयात्रा बौंसी स्थित श्री दिगम्बर जैन कार्यालय मंदिर से प्रारंभ होकर नगर भ्रमण करते हुए मंदार पर्वत की तलहटी तक पहुंचेगी। इसके बाद श्रद्धालु मंदार पर्वत के शिखर पर स्थित मोक्ष स्थली दिगम्बर जैन मंदिर पहुंचेंगे, जहां निर्वाण महोत्सव के धार्मिक कार्यक्रम संपन्न होंगे।
मंदारगिरी में बढ़ी धार्मिक चहल-पहल
निर्वाणोत्सव को लेकर मंदिर एवं क्षेत्र परिसर में तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। रथयात्रा और पर्वत शिखर पर होने वाले धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है। दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन मंदारगिरी से निकला संदेश भी स्पष्ट रहा—तप केवल त्याग की बाहरी क्रिया नहीं, बल्कि अपनी इच्छाओं और आंतरिक विकारों पर नियंत्रण कर आत्मशुद्धि की ओर बढ़ने की साधना है।









