
नवजात एवं कुपोषित बच्चों के लिए विशेष डाइट प्लान, स्वास्थ्य की नियमित मॉनिटरिंग और बेहतर वेंटिलेशन की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा
दैनिक बिहार पत्रिका। खगड़िया। जिलाधिकारी विक्रम विरकर की अध्यक्षता में जिला निरीक्षण समिति ने मंगलवार को विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान का निरीक्षण किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने संस्थान में बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाओं, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा एवं देखभाल की व्यवस्था का जायजा लिया और संस्थान के बेहतर संचालन को लेकर संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

संस्थान के सुचारु संचालन को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने अनुमंडल पदाधिकारी, सदर एवं सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई को कार्यालय को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

निरीक्षण के दौरान नवजात शिशुओं एवं कुपोषित बच्चों के पोषण पर विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने इनके लिए विशेष डाइट प्लान तैयार कर उसका नियमित रूप से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने बच्चों की उम्र, स्वास्थ्य और पोषण संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

बच्चों के कमरों में पर्याप्त हवा और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए उचित वेंटिलेशन की व्यवस्था करने तथा आवश्यक स्थानों पर नेट अथवा जाली लगाने का निर्देश दिया गया। साथ ही संस्थान में स्वच्छता बनाए रखने और बच्चों के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।

बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित मॉनिटरिंग को लेकर सदर अस्पताल से आए चिकित्सकीय अधिकारी को प्रत्यक्ष एवं दूरभाष के माध्यम से नियमित निगरानी रखने का निर्देश दिया गया। किसी भी बच्चे में स्वास्थ्य संबंधी समस्या सामने आने पर तत्काल आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने को कहा गया।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिलाधिकारी ने रेलवे थाना एवं महिला थाना को संवेदनशीलता के साथ कार्य करने तथा संस्थान के साथ आवश्यक समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया, ताकि बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षण को प्रभावी तरीके से सुनिश्चित किया जा सके।
जिलाधिकारी ने आम लोगों से अपील की कि यदि किसी कारणवश कोई नवजात या शिशु माता-पिता अथवा परिवार द्वारा पालना संभव नहीं होने की स्थिति में हो, तो उसे सड़क, अस्पताल, सार्वजनिक स्थान या किसी अन्य असुरक्षित स्थान पर नहीं छोड़ें। ऐसी स्थिति में विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान में उपलब्ध पालना (Cradle) का उपयोग किया जाए।
उन्होंने कहा कि पालना के माध्यम से बच्चे को सुरक्षित रूप से संस्थान तक पहुंचाया जा सकता है, जहां उसकी देखभाल एवं संरक्षण की समुचित व्यवस्था की जाती है और विधि एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाती है। जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चे को असुरक्षित तरीके से छोड़ने के बजाय सुरक्षित परित्याग की निर्धारित व्यवस्था का उपयोग उसके जीवन, सुरक्षा एवं भविष्य के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।
निरीक्षण के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी, सदर, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, सदर, पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय), सहायक निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तिकरण कोषांग, सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई, सदर अस्पताल के चिकित्सक, बाल संरक्षण पदाधिकारी, किशोर न्याय परिषद के सदस्य, तटवासी न्याय समाज के समन्वयक, बुनियाद केंद्र के परामर्शी, पर्यवेक्षण गृह के अधीक्षक सहित संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।
रिपोर्ट: कृष्णा टेकरीवाल, दैनिक बिहार पत्रिका









