
498 केंद्र किराये के भवनों में संचालित, 190 सरकारी भवनों में स्थानांतरित; कमजोर प्रदर्शन करने वाली परियोजनाओं को एक सप्ताह में सुधार का निर्देश
बांका:- जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने, बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाने और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने को लेकर जिला प्रशासन ने निगरानी तेज कर दी है। जिला पदाधिकारी अंशुल अग्रवाल की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित मिनी सभागार में समेकित बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) से संबंधित योजनाओं की समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन, पोषण ट्रैकर की प्रगति, कुपोषित बच्चों की पहचान और प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना की उपलब्धियों की समीक्षा की गई। डीएम ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा में कमियों को दूर करने और कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया।
किराये के आंगनबाड़ी केंद्रों को सरकारी भवनों में शिफ्ट करने पर जोर
बैठक में किराये के भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को सरकारी विद्यालयों अथवा अन्य उपलब्ध सरकारी भवनों में स्थानांतरित करने को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया। जिन क्षेत्रों में उपयुक्त सरकारी भवन उपलब्ध नहीं हैं, वहां भूमि चिह्नित कर नए आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया। प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, बांका जिले में वर्तमान में 498 आंगनबाड़ी केंद्र किराये के भवनों में संचालित हैं। इनमें से मिशन मोड में चलाए गए अभियान के तहत अब तक 190 केंद्रों को सरकारी भवनों में स्थानांतरित किया जा चुका है। इससे किराये पर होने वाले सरकारी खर्च में बचत हुई है। जिला प्रशासन का लक्ष्य शेष केंद्रों को भी चरणबद्ध तरीके से सरकारी भवनों में स्थानांतरित करना अथवा उनके लिए अपने भवन का निर्माण कराना है। इसके अलावा जर्जर आंगनबाड़ी केंद्रों और अन्य सरकारी भवनों का कायाकल्प अभियान के तहत जीर्णोद्धार कराने पर भी जोर दिया गया, ताकि बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और बेहतर वातावरण मिल सके।

पोषण ट्रैकर में चौथे स्थान से पहले स्थान तक पहुंचने की तैयारी
बैठक में पोषण ट्रैकर के सभी संकेतकों की विस्तृत समीक्षा की गई। राज्य स्तर पर बांका की चौथी रैंक होने पर डीएम ने संतोष व्यक्त किया, लेकिन अगले महीने जिले को प्रथम स्थान पर लाने का लक्ष्य निर्धारित किया। उन्होंने निर्देश दिया कि इस महीने कार्ययोजना बनाकर सभी संकेतकों में अपेक्षित सुधार सुनिश्चित किया जाए और प्रत्येक प्रविष्टि को शत-प्रतिशत पूरा कराया जाए। नाटापन, कुपोषण और अतिकुपोषण से प्रभावित बच्चों की विशेष अभियान चलाकर पहचान करने को कहा गया। महिला पर्यवेक्षिकाओं को इन बच्चों की स्थिति में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया। अतिकुपोषित और कम वजन वाले बच्चों को पहचान कर चिकित्सकीय परामर्श के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र भेजने पर भी जोर दिया गया।
कमजोर प्रदर्शन पर जवाबदेही तय होगी
डीएम ने पोषण ट्रैकर के विभिन्न संकेतकों में कमजोर प्रदर्शन करने वाली महिला पर्यवेक्षिकाओं और आंगनबाड़ी सेविकाओं से कारण पृच्छा करने तथा विभागीय निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करने को कहा। अपेक्षित सुधार नहीं होने की स्थिति में चयनमुक्त करने की कार्रवाई का भी निर्देश दिया गया। बैठक में बाराहाट और धोरैया सहित कमजोर प्रदर्शन करने वाली परियोजनाओं पर नाराजगी जताते हुए एक सप्ताह के भीतर सुधार करने को कहा गया। उपलब्ध विवरण में बाराहाट परियोजना का नाम दो बार आया है। साथ ही आभा आईडी, अपार आईडी और कमजोर बच्चों से संबंधित आंकड़ों की प्रगति पर भी असंतोष व्यक्त किया गया। डीएम ने विशेष अभियान चलाकर संबंधित कार्य पूरा करने और आंकड़ों को पोषण ट्रैकर पर अपलोड करने का निर्देश दिया। टीएचआर यानी टेक-होम राशन वितरण और गर्म पका भोजन वितरण की प्रविष्टि भी पोषण ट्रैकर एप पर शत-प्रतिशत दर्ज कराने को कहा गया। अगली बैठक में सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों को अपनी-अपनी परियोजना की प्रगति रिपोर्ट पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से स्वयं प्रस्तुत करनी होगी। जिला स्तर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रतिदिन प्रगति की समीक्षा करने और अधिकारियों की उपस्थिति दर्ज कराने का भी निर्देश दिया गया।
मातृत्व वंदना योजना में वंचित लाभुकों की पहचान
प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना की समीक्षा के दौरान लक्ष्य के अनुरूप कम उपलब्धि पर डीएम ने असंतोष जताया। उन्होंने अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक प्रगति में सुधार करने का निर्देश दिया। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर वंचित लाभुकों की पहचान करने और उनके आवेदन अपलोड कराने को कहा गया।
वन स्टॉप सेंटर के मामलों का नियमित फॉलोअप
बैठक में वन स्टॉप सेंटर के निष्पादित मामलों की भी समीक्षा की गई। डीएम ने संबंधित अधिकारियों को मामलों का नियमित फॉलोअप करने और उनसे जुड़े अभिलेखों का व्यवस्थित संधारण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। बैठक में सभी परियोजनाओं के बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, जिला समन्वयक, जिला परियोजना प्रबंधक तथा जिला स्तर के अन्य कर्मी उपस्थित रहे।









