
टूटे बैरियर और क्षतिग्रस्त गार्डर के बीच पुल पार कर रहे ट्रक व बसें; डायवर्सन तैयार होने तक सख्त निगरानी की मांग
बौंसी/बांका:- बिहार और झारखंड को जोड़ने वाले भागलपुर-हंसडीहा राष्ट्रीय राजमार्ग-133ई पर स्थित भलजोर पुल की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। पुल के जर्जर पिलरों में दरारें मिलने के बाद भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई गई थी। लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार, बैरिकेडिंग टूटने और रास्ते में लगाए गए पत्थर हटाए जाने के बाद भी भारी वाहन और बसें लगातार पुल से गुजर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पुल की स्थिति को लेकर खतरे की आशंका जताई जा चुकी है, तो प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू क्यों नहीं किया जा रहा है?
दो दिनों में टूटी बैरिकेडिंग, पत्थर भी हटाए गए
जानकारी के मुताबिक, भारी वाहनों को रोकने के लिए पुल के दोनों छोर पर पहले बैरिकेडिंग की गई थी। लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि दो दिनों के भीतर ही रात के समय बैरिकेडिंग तोड़ दी गई। इसके बाद प्रशासन की ओर से रास्ते पर बड़े-बड़े पत्थर रखकर वाहनों को रोकने की कोशिश की गई। ग्रामीणों के अनुसार, पत्थरों को भी एक ही रात में हटा दिया गया, जिसके बाद भारी वाहनों की आवाजाही फिर शुरू हो गई। इस घटनाक्रम ने पुल पर लगाए गए प्रतिबंध और उसकी निगरानी की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल अवरोधक लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोई उन्हें हटाकर प्रतिबंधित मार्ग से वाहन न निकाल सके।

हाइवा की टक्कर से गार्डर क्षतिग्रस्त
पुल के दोनों सिरों पर लगे लोहे के गार्डर भी एक हाइवा की टक्कर से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब दस दिनों से इनकी मरम्मत नहीं कराई गई है। उनका दावा है कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद भारी वाहन पुल पार कर रहे हैं।पुल के पिलरों में दरारें और गार्डर की क्षतिग्रस्त स्थिति को देखते हुए लोगों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि पुल को भारी वाहनों के लिए असुरक्षित माना गया है, तो उस पर आवाजाही रोकने के लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसे आसानी से तोड़ा या हटाया न जा सके।
निरीक्षण के बाद भी सुरक्षा व्यवस्था पर नजर
भलजोर पुल की स्थिति का निरीक्षण जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल, कटोरिया विधायक पूरनलाल टुडू और संबंधित विभागों के अधिकारियों द्वारा किया जा चुका है। भारी वाहनों के लिए पुल को असुरक्षित माने जाने के मद्देनजर इसके विकल्प के रूप में डायवर्सन का निर्माण कराया जा रहा है। हालांकि, डायवर्सन चालू होने तक पुल पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना महत्वपूर्ण है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डायवर्सन का काम पूरा होने में समय लग सकता है, लेकिन इस दौरान पुल पर खतरे की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। भारी वाहनों की आवाजाही जारी रहने से दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। इसलिए संबंधित विभागों को तत्काल प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
स्थानीय लोगों की मांग—24 घंटे हो निगरानी
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने क्षतिग्रस्त बैरियर तथा गार्डर की तत्काल मरम्मत कराने, भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोकने और पुल के दोनों सिरों पर चौबीसों घंटे निगरानी की व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रतिबंध का पालन सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार कर्मियों की तैनाती और नियमित निगरानी जरूरी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पुल की खराब स्थिति की जानकारी प्रशासन और संबंधित विभागों को है, तो सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की चूक को रोकने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे? यदि प्रतिबंध के बावजूद भारी वाहनों की आवाजाही जारी रहती है और कोई दुर्घटना होती है, तो जवाबदेही किसकी होगी? फिलहाल, भलजोर पुल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के बीच स्थानीय लोगों की मांग है कि किसी अप्रिय घटना का इंतजार किए बिना तत्काल कार्रवाई की जाए और डायवर्सन चालू होने तक पुल पर आवाजाही नियंत्रित रखने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं।









