
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में CSR नीति 2025 पर उन्मुखीकरण कार्यक्रम, कंपनियों, बैंकों और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों से सक्रिय भागीदारी की अपील
पटना। बिहार के समावेशी और सतत विकास को नई गति देने के लिए राज्य सरकार अब कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी CSR फंड के प्रभावी उपयोग पर विशेष ध्यान दे रही है। इसी उद्देश्य से शुक्रवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में बिहार स्टेट CSR नीति 2025 के क्रियान्वयन को लेकर एक उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, प्रमुख कॉरपोरेट कंपनियों और विभिन्न बैंकिंग संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि CSR के तहत उपलब्ध संसाधनों को राज्य की विकास प्राथमिकताओं से जोड़ना समय की जरूरत है। उन्होंने कंपनियों और वित्तीय संस्थानों से बिहार के विकास में केवल औपचारिक भागीदारी नहीं, बल्कि ठोस परियोजनाओं के माध्यम से योगदान देने की अपील की।
बच्चों की शिक्षा और पोषण को मिले प्राथमिकता
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने अपने संबोधन में बच्चों के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कहा कि बच्चे ही आने वाले बिहार की ताकत हैं। उन्होंने कॉरपोरेट संस्थानों से आग्रह किया कि वे अपने CSR फंड का बड़ा हिस्सा सरकारी स्कूलों और कॉलेजों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने में खर्च करें। उन्होंने विद्यालयों और महाविद्यालयों में आवश्यक सुविधाओं के विकास के साथ बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही। इसके लिए जरूरतमंद बच्चों को ‘फूड बास्केट्स’ उपलब्ध कराने की पहल पर जोर दिया गया, ताकि पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सके।
CSR फंडिंग के लिए दो विकल्प निर्धारित
कार्यक्रम में मुख्य सचिव ने CSR नीति के तहत फंड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि इच्छुक कंपनियां और संस्थान निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दो विकल्पों के माध्यम से अपनी राशि खर्च कर सकते हैं। पहले विकल्प यानी रूट-1 के तहत डोनर्स बिहार स्टेट CSR सोसाइटी के माध्यम से सीधे फंड ट्रांसफर कर सकते हैं। वहीं, दूसरे विकल्प यानी रूट-2 में CSR पोर्टल पर उपलब्ध परियोजनाओं की सूची से अपनी पसंद की परियोजना चुनकर संबंधित क्रियान्वयन एजेंसी को सीधे राशि जारी की जा सकती है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों और दानदाता संस्थाओं से इन दोनों व्यवस्थाओं का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने को कहा, ताकि स्वीकृत योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंच सके।
छह चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया
बैठक में वित्त विभाग की सचिव (व्यय) रचना पाटिल ने बिहार स्टेट CSR नीति 2025 के विजन, कार्ययोजना और समयरेखा पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने पंजीकरण से लेकर फंड के उपयोग और उसकी उपयोगिता सुनिश्चित करने तक की छह चरणों वाली प्रक्रिया के बारे में प्रतिनिधियों को जानकारी दी। इस दौरान वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। बैठक में CSR फंड के पारदर्शी संचालन, परियोजनाओं के चयन और निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप राशि के उपयोग को लेकर चर्चा की गई।
सार्वजनिक उपक्रमों, बैंकों और कंपनियों की भागीदारी
इस उन्मुखीकरण कार्यक्रम में कई बड़े संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, NTPC, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारतीय जीवन बीमा निगम, पावर ग्रिड, REC और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया शामिल रहे। बैंकिंग क्षेत्र से भारतीय स्टेट बैंक, HDFC बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक, केनरा बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, यस बैंक, एक्सिस बैंक, ICICI बैंक, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और NABARD सहित कई संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। वहीं कॉरपोरेट क्षेत्र से ITC, आदित्य विजन, श्री सीमेंट, L&T एनर्जी, मारुति सुजुकी, जिरोधा, कोका-कोला, कैंपा कोला, अडाणी और अन्य कंपनियों के प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
पारदर्शिता के साथ सामाजिक बदलाव का लक्ष्य
कार्यक्रम के समापन पर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी कंपनियों, बैंकों और सार्वजनिक उपक्रमों से बिहार के विकास अभियान में सक्रिय सहयोग देने की अपील की। उन्होंने कहा कि CSR फंड का उपयोग ऐसी परियोजनाओं में होना चाहिए, जिनका असर समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों तक स्पष्ट रूप से दिखाई दे। राज्य सरकार की इस पहल का उद्देश्य कॉरपोरेट संसाधनों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और आधारभूत सुविधाओं जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जोड़ना है। अब देखना होगा कि CSR नीति 2025 के तहत संस्थानों की भागीदारी किस तरह धरातल पर परियोजनाओं में बदलती है और बिहार के विकास को कितना लाभ पहुंचाती है।








