मानसी थाना प्रकरण में कार्रवाई में देरी पर पत्रकारों का आक्रोश, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

दो दिन बाद भी विभागीय कार्रवाई स्पष्ट नहीं, सीसीटीवी फुटेज की जांच और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की उठी मांग

खगड़िया। मानसी थाना में एक पत्रकार के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले में पुलिस अधीक्षक के संज्ञान लेने के दो दिन बाद भी किसी स्पष्ट विभागीय कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आने से पत्रकारों में नाराजगी बढ़ गई है। पत्रकार संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग दोहराई है।

जिला प्रेस क्लब पत्रकार संघ के अध्यक्ष सुमलेश कुमार ने कहा कि यदि मानसी थाना परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो घटना की वास्तविकता सामने आ जाएगी। उनका आरोप है कि संबंधित पुलिसकर्मियों ने पत्रकार के साथ अमर्यादित व्यवहार किया और अब मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

पत्रकार संघ ने पुलिस अधीक्षक भानु प्रताप सिंह को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच एवं विभागीय कार्रवाई की मांग की थी। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि मानसी थाना के एसआई मुकेश कुमार, एसआई बीना कुमारी तथा दो चौकीदारों ने एक पत्रकार के साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें करीब दो घंटे तक हाजत में रखा। इसके बाद बिना किसी स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया के छोड़ दिया गया। संघ ने यह भी सवाल उठाया कि यह कार्रवाई किसके आदेश पर और किन कानूनी प्रावधानों के तहत की गई।

संघ के संरक्षक किरण देव यादव ने आरोप लगाया कि ड्यूटी के दौरान संबंधित पुलिसकर्मी मोबाइल पर रील देख रहे थे तथा सरकारी रजिस्टर के ऊपर नाश्ता कर रहे थे। उनका कहना है कि पत्रकार द्वारा इसका फोटो और वीडियो बनाए जाने के बाद पुलिसकर्मी नाराज हो गए और विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई।

इस मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक से मिले प्रतिनिधिमंडल में संरक्षक किरण देव यादव, दैनिक भास्कर डिजिटल के रिपोर्टर गौतम चौरसिया, जगदूत के रिपोर्टर प्रभुजी बिक्रम कुमार सहित अन्य सदस्य शामिल थे।

वहीं, मानसी के पूर्व उप प्रमुख हीरालाल यादव ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध सख्त विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक भानु प्रताप सिंह ने मानसी थाना प्रभारी को जांच कर संबंधित पुलिसकर्मियों से स्पष्टीकरण लेने तथा आवश्यक विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक इस संबंध में किसी ठोस कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी थी। पत्रकार संगठनों ने मांग की है कि निष्पक्ष जांच कर तथ्य सामने लाए जाएं और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि पत्रकारों की सुरक्षा एवं स्वतंत्र कार्य वातावरण पर विश्वास बना रहे।

रिपोर्ट: दैनिक बिहार पत्रिका, खगड़िया 

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