कैलाश झा किंकर की पुण्यतिथि पर सजी साहित्यिक महफिल, विचार गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन में दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

हिंदी भाषा साहित्य परिषद के आयोजन में साहित्यकारों ने किंकर को बताया खगड़िया की साहित्यिक चेतना का प्रखर हस्ताक्षर

खगड़िया। हिंदी भाषा साहित्य परिषद, खगड़िया के तत्वावधान में सोमवार को प्रख्यात साहित्यकार एवं स्मृतिशेष कवि कैलाश झा किंकर की पुण्यतिथि पर विचार गोष्ठी सह भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, कवियों, बुद्धिजीवियों एवं साहित्य प्रेमियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर किंकर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके साहित्यिक योगदान को याद किया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि खगड़िया नगर परिषद की चेयरमैन अर्चना कुमारी थीं, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार प्रभाकर प्रभात एवं दरभंगा से पधारे चर्चित कवि विनोद कुमार हंसौड़ा उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार शंकरानंद ने किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए प्रो. अनिल ठाकुर ने कहा कि कैलाश झा किंकर ने खगड़िया की साहित्यिक प्रतिभाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। वहीं राजेंद्र राजेश ने कहा कि किंकर ने अपनी लेखनी से निर्जीव संवेदनाओं में भी प्राण फूंकने का कार्य किया।

डॉ. सुनील कुमार मिश्र ने कहा कि कैलाश झा किंकर भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज आज भी हवा, पानी और साहित्यिक परिवेश में गूंजती है। रामकृष्ण आनंद ने कहा कि उन्होंने कविता को आम लोगों तक पहुंचाकर साहित्य को जन-जन का माध्यम बनाया।

विशिष्ट अतिथि प्रभाकर प्रभात ने कहा कि कैलाश झा किंकर को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब खगड़िया में साहित्य की धारा निरंतर प्रवाहित होती रहे। वहीं विनोद कुमार हंसौड़ा ने अपनी काव्यांजलि में कहा—
“सदा ही कर्मयोगी का प्रखर आदित्य होता है…”
जिस पर पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।

कपिलेश्वर कपिल ने कहा कि कैलाश झा किंकर आज भी खगड़िया की मिट्टी के कण-कण में बसते हैं। मुख्य अतिथि अर्चना कुमारी ने कहा कि किंकर की रचनाएं नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने साहित्य के माध्यम से समाज को जोड़ने का जो कार्य किया, वह सदैव याद रखा जाएगा।

कवि सम्मेलन में शंकरानंद ने अपनी मार्मिक कविता ‘पिता का होना’ का पाठ करते हुए कहा—
“किसी अधलिखी चिट्ठी की तरह चले गए पिता, जिसका पूरा होना अब कभी संभव नहीं हो पाएगा।”
उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को भावुक कर दिया।

इस अवसर पर अमिराज कुमार आनंद, शशि शेखर, पूजा श्रीवास्तव, स्वराक्षी स्वरा, कंचन नंदन हर्ष, राम कुमार, ललिता कुमारी, अशोक कुमार चौधरी, संध्या किंकर, दुर्गेश नंदन, धर्मेश कुमार, मंजू देवी सहित अनेक साहित्यकारों ने अपने विचार एवं काव्य पाठ प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम के दौरान साहित्य और भाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कई साहित्यकारों को कैलाश झा किंकर स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

अंत में संध्या किंकर ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।

रिपोर्ट: दैनिक बिहार पत्रिका, खगड़िया 

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Author: दैनिक बिहार पत्रिका

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