
चांदन/बांका। आनंदपुर थाना क्षेत्र में संचालित बालू घाटों से बड़े पैमाने पर बालू का उठाव हो रहा है और यहां से बालू दूसरे राज्यों तक भेजे जाने की बात सामने आ रही है। इसके बावजूद स्थानीय जरूरतमंद लोगों को घर बनाने या छोटे-मोटे सरकारी काम में उपयोग करने के लिए एक-दो ट्रैक्टर बालू भी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और बेलहर विधायक मनोज यादव से स्थानीय लोगों के लिए नियमानुसार ट्रैक्टर चालान के माध्यम से बालू उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित कराने की मांग की है।बरहाल आनंदपुर थाना क्षेत्र में महादेव इंकलाब (डढ़वा बालू घाट) और मर्टिकुलर एजेंसी (नोनियां बालू घाट) दो बालू घाट संचालित हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि इन घाटों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में बालू का उठाव कर विभिन्न स्थानों तक भेजा जाता है।लेकिन स्थानीय स्तर पर घर बनाने वाले लोगों को बालू खरीदने में काफी परेशानी होती है। ग्रामीणों के मुताबिक किसी जरूरतमंद परिवार को मकान निर्माण के लिए महज एक या दो ट्रैक्टर बालू की आवश्यकता होती है, तो उसे भी घाट से वैध तरीके से बालू लेने के लिए ट्रैक्टर चालान उपलब्ध नहीं हो पाता है। ऐसे में लोगों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब घाट पर बालू उपलब्ध है और उसका परिवहन लगातार हो रहा है, तो स्थानीय लोगों को उनकी जरूरत के मुताबिक निर्धारित प्रक्रिया और शुल्क के तहत बालू उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
चालान मिले तो अवैध उठाव पर लगेगा अंकुश
ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय लोगों को ट्रैक्टर चालान नहीं मिलने के कारण चोरी-छिपे बालू उठाव की स्थिति पैदा होती है। यदि जरूरतमंद लोगों को घाट से ही नियमानुसार ट्रैक्टर चालान उपलब्ध करा दिया जाए, तो उन्हें अवैध तरीके से बालू उठाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे चोरी-छिपे होने वाले बालू उठाव और अवैध कारोबार पर भी प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
ग्रामीणों ने कहा कि बालू की उपलब्धता को लेकर स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, ताकि स्थानीय लोगों को अपने घर निर्माण जैसे जरूरी कार्यों के लिए परेशान नहीं होना पड़े।
अधिक खनन से नदी की स्थिति पर भी सवाल
इधर, ग्रामीणों ने बालू घाटों पर हो रहे खनन के तरीके को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्धारित मानक से अधिक गहराई तक बालू खनन किए जाने के कारण नदी की प्राकृतिक स्थिति में बदलाव आया है। कई स्थानों पर नदी काफी गहरी हो गई है और नदी के तल में जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं।ग्रामीणों के अनुसार नदी में कई जगह बालू की जगह पत्थर ही पत्थर दिखाई देने लगे हैं। नदी में बने गहरे गड्ढे बरसात के दिनों में पानी से भर जाने के बाद लोगों और मवेशियों के लिए खतरा बन सकते हैं। नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों को आशंका है कि लगातार अत्यधिक खनन का असर आसपास के जलस्रोतों पर भी पड़ रहा है।
जलस्रोतों के घटने की भी जताई चिंता
नदी से सटे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि पहले जिन स्थानों पर पानी आसानी से उपलब्ध हो जाता था, वहां अब जलस्रोतों में कमी महसूस की जा रही है। ग्रामीणों ने बालू खनन के कारण भू-जल और आसपास के जलस्रोतों पर पड़ने वाले प्रभाव की भी जांच कराने की मांग की है।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और बेलहर विधायक मनोज यादव से पूरे मामले में पहल करने की मांग की है। उनका कहना है कि स्थानीय जरूरतमंदों को सरकार के निर्धारित नियम और दर के अनुसार ट्रैक्टर चालान उपलब्ध कराकर बालू खरीदने की सुविधा दी जाए।
साथ ही बालू घाटों पर निर्धारित मानकों के अनुरूप ही खनन हो, नदी में बने गहरे गड्ढों की स्थिति की जांच कराई जाए और आसपास के जलस्रोतों पर पड़ रहे प्रभाव का भी आकलन किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय लोगों को वैध तरीके से बालू उपलब्ध कराने की व्यवस्था होने से उनकी परेशानी दूर होगी और अवैध बालू कारोबार पर भी रोक लगाने में प्रशासन को मदद मिलेगी।











