
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 8वीं राज्यस्तरीय NCORD बैठक; सीमावर्ती इलाकों और रेलवे पर बढ़ेगी निगरानी, NDPS मामलों में तय SOP के तहत कार्रवाई के निर्देश
बांका:- मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध कारोबार और युवाओं में नशे की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए राज्य स्तर पर निगरानी और कार्रवाई को और सुदृढ़ करने की कवायद तेज कर दी गई है। 8 सितंबर 2026 को मुख्य सचिव, बिहार सरकार की अध्यक्षता में 8वीं NCORD (State Level Narcotics Control Bureau) की उच्चस्तरीय बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई। बैठक में बांका के जिला पदाधिकारी अंशुल अग्रवाल सहित संबंधित पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य फोकस मादक पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई के साथ बच्चों और युवाओं को नशे से बचाने, नशा मुक्ति एवं पुनर्वास व्यवस्था को मजबूत करने तथा एनडीपीएस मामलों में जांच और कानूनी कार्रवाई को प्रभावी बनाने पर रहा।
स्कूल-कॉलेज के आसपास 500 मीटर तक ‘ड्रग-फ्री जोन’
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्देश शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा को लेकर दिया गया। मुख्य सचिव ने राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों के चारों ओर 500 मीटर के दायरे को ‘ड्रग-फ्री जोन’ के रूप में प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया। इस संबंध में मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो की ओर से सभी जिलाधिकारियों एवं पुलिस अधीक्षकों को आवश्यक दिशा-निर्देश भेजे जा चुके हैं। इसका उद्देश्य स्कूल-कॉलेज के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री, आपूर्ति और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाना है।
बॉर्डर से रेलवे तक तस्करों पर रहेगी पैनी नजर
मादक पदार्थों की आवाजाही रोकने के लिए सीमावर्ती जिलों में विशेष अभियान चलाने को कहा गया है। वहीं ट्रेनों और रेल परिसरों के माध्यम से नशीले पदार्थों की तस्करी की संभावना को देखते हुए रेलवे पुलिस को भी निगरानी और कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए। रेलवे पुलिस अधीक्षकों को मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
पांच वर्षों के NDPS मामलों का खंगाला गया रिकॉर्ड
उच्चस्तरीय बैठक में पिछले पांच वर्षों के दौरान NDPS अधिनियम के तहत दर्ज मामलों, गिरफ्तार अभियुक्तों और जब्त किए गए मादक पदार्थों से संबंधित कार्रवाई की विस्तृत समीक्षा की गई। गांजा, हेरोइन, स्मैक, कोकीन, अफीम और कफ सिरप सहित अन्य मादक पदार्थों की जब्ती से जुड़े आंकड़ों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही वर्ष 2026 में जुलाई तक दर्ज एनडीपीएस मामलों में गिरफ्तारी और जब्ती की स्थिति की भी समीक्षा की गई।
तलाशी से अनुसंधान तक SOP के अनुसार होगी कार्रवाई
एनडीपीएस मामलों में कानूनी प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए पुलिस अधिकारियों को तलाशी, जब्ती, नमूना संग्रह एवं अनुसंधान से संबंधित हैंडबुक/मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) उपलब्ध कराई गई है। सभी जिलों को निर्देश दिया गया कि मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई प्रभावी ढंग से हो सके।
संगठित तस्करों पर PIT-NDPS Act के तहत कार्रवाई की तैयारी
बैठक में संगठित रूप से मादक पदार्थों की तस्करी में संलिप्त खतरनाक अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई पर भी जोर दिया गया। ऐसे मामलों में PIT-NDPS Act के तहत प्रस्ताव तैयार कर गृह विभाग को भेजे जाने की जानकारी दी गई। इसके माध्यम से संगठित नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़े लोगों के विरुद्ध प्रभावी कानूनी कार्रवाई की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
नशे की गिरफ्त में आए लोगों के पुनर्वास पर भी फोकस
कार्रवाई के साथ नशे की लत से प्रभावित लोगों के उपचार और पुनर्वास को भी बैठक में प्राथमिकता दी गई। मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2017 के तहत पंजीकृत नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों (IRCA एवं DDAC) के संचालन की समीक्षा की गई। इन केंद्रों की कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाने तथा जरूरतमंद लोगों को बेहतर उपचार, परामर्श और पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
रोकथाम, कार्रवाई और पुनर्वास—तीनों मोर्चों पर अभियान
बैठक के निर्देशों से स्पष्ट है कि नशे के खिलाफ अभियान को अब रोकथाम, प्रवर्तन और पुनर्वास तीनों स्तरों पर मजबूत करने की रणनीति अपनाई जा रही है। स्कूल-कॉलेजों के आसपास ड्रग-फ्री जोन, सीमावर्ती क्षेत्रों एवं रेलवे पर विशेष निगरानी और संगठित तस्करों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई इसी रणनीति का हिस्सा है। राज्य स्तर से मिले निर्देशों के बाद जिलों में इन व्यवस्थाओं को प्रभावी रूप से लागू करने और मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करने पर जोर रहेगा।











