
फर्जी प्रमाण-पत्र पर बहाल शिक्षक और टोला सेवक बर्खास्त; तीन विद्यालयों से ₹1.31 लाख की वसूली का आदेश, कम छात्र उपस्थिति पर भी प्रशासन ने जताई चिंता
बांका:- जिले के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति, छात्र उपस्थिति, मध्याह्न भोजन और शैक्षणिक व्यवस्था में गड़बड़ी को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। गुरुवार को समाहरणालय के मिनी सभागार में जिला पदाधिकारी अंशुल अग्रवाल की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में फर्जी हाजिरी से लेकर विद्यालय निरीक्षण और मध्याह्न भोजन तक के मामलों की बिंदुवार समीक्षा करते हुए कई कड़े निर्देश दिए गए। समीक्षा के दौरान जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि विद्यालय में विलंब से उपस्थिति दर्ज करने वाले 176 शिक्षकों से कारण-पृच्छा की गई है। वहीं, फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर बहाल एक शिक्षक और एक टोला सेवक को सेवा से बर्खास्त किया गया है। डीएम अंशुल अग्रवाल ने विद्यालयों में फर्जी तरीके से हाजिरी संधारित किए जाने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए दोषी शिक्षकों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई का निर्देश दिया। उन्होंने सभी प्रधानाध्यापकों को निर्देशित किया कि उनके विद्यालय में कोई शिक्षक फर्जी तरीके से हाजिरी बनाता है तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित विभागीय पदाधिकारी को दें। ऐसे मामलों में शिक्षक के साथ प्रधानाध्यापक की संलिप्तता पाए जाने पर उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। बैठक में सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को रोस्टर तैयार कर सरकारी विद्यालयों के साथ कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय सहित अन्य संस्थानों का नियमित एवं औचक निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया। निरीक्षण में शिक्षकों की उपस्थिति, शैक्षणिक गतिविधियों और विद्यालय की अन्य व्यवस्थाओं की जांच कर प्रतिवेदन उपलब्ध कराना होगा। अगस्त माह में लक्ष्य से कम विद्यालयों का निरीक्षण किए जाने पर डीएम ने नाराजगी जताई। जिला शिक्षा पदाधिकारी को सभी नव प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों के लिए शिक्षा विभाग के कार्यों की प्वाइंट-टू-प्वाइंट चेकलिस्ट तैयार कर उपलब्ध कराने को कहा गया, ताकि निर्धारित जिम्मेदारियों के अनुरूप कार्यों का निष्पादन हो सके। इधर, बाराहाट प्रखंड के शिक्षक राजीव रंजन द्वारा विद्यालयों का निरीक्षण किए जाने के मामले को भी डीएम ने गंभीरता से लिया। जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को स्वयं मामले की जांच कर दोष पाए जाने पर कठोर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। विद्यालयों में छात्रों की कम उपस्थिति पर भी डीएम ने गंभीर चिंता जताई। टोला सेवक एवं तालिमी मरकज के शिक्षा स्वयंसेवकों के कार्यों की समीक्षा करने तथा बच्चों को विद्यालय तक नहीं लाने या निर्धारित कार्य नहीं करने वालों को चिह्नित कर कार्रवाई करने को कहा गया। समाचार पत्रों में शिक्षा विभाग से संबंधित प्रकाशित नकारात्मक खबरों पर भी प्रशासन की नजर रहेगी। डीएम ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को ऐसी खबरों की गंभीरता से जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने तथा मामलों का समयबद्ध निष्पादन कर कार्रवाई की जानकारी जिला प्रशासन को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
मध्याह्न भोजन में गड़बड़ी पर ₹1,31,925 की वसूली
मध्याह्न भोजन योजना की समीक्षा में सामने आया कि तीन विद्यालयों में वास्तविक छात्र उपस्थिति कम रहने के बावजूद हाजिरी पंजी में अधिक उपस्थिति दिखाई गई थी। इस मामले में उत्क्रमित मध्य विद्यालय लक्ष्मीपुर, कटोरिया से ₹16,190, उत्क्रमित मध्य विद्यालय ताहिरपुर उर्दू, धोरैया से ₹71,660 और उत्क्रमित मध्य विद्यालय जाखा, धोरैया से ₹44,075, यानी कुल ₹1,31,925 की वसूली का आदेश दिया गया है। इसके अतिरिक्त चार अन्य विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों से वसूली की कार्रवाई प्रक्रियाधीन बताई गई। डीएम ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को विद्यालय निरीक्षण के दौरान वेंडरों द्वारा उपलब्ध कराई जा रही खाद्य सामग्री, फल और अंडे की गुणवत्ता की अनिवार्य रूप से जांच करने को कहा। साथ ही निरीक्षण को केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रखते हुए विद्यालयों में अपेक्षित सुधार सुनिश्चित करने और निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया। बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी, सभी जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, सहायक अभियंता, सभी संभाग प्रभारी, सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी तथा शिक्षा विभाग के अन्य कर्मी मुख्य रूप से मौजूद रहे।









