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BANKA NEWS: किसी को श्रवण यंत्र तो किसी को व्हील चेयर; 122 दिव्यांग बच्चों की जरूरत का हुआ आकलन

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Written by
Kumar Chandan

कटोरिया बीआरसी में विशेष शिविर, 38 बच्चों के लिए श्रवण यंत्र और 25 के लिए व्हील चेयर की अनुशंसा; छह बच्चों को बेहतर जांच के लिए सदर अस्पताल बांका किया गया रेफर

बांका:- दिव्यांगता किसी बच्चे की पढ़ाई की राह में बाधा न बने और जरूरत के अनुसार सहायक संसाधन उपलब्ध कराकर उसे शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके, इसी उद्देश्य से बुधवार को प्रखंड संसाधन केंद्र (B.R.C.), कटोरिया में दिव्यांगता प्रमाणीकरण-सह-उपकरण आकलन शिविर आयोजित किया गया। बिहार शिक्षा परियोजना, बांका के समावेशी शिक्षा कार्यक्रम के तहत आयोजित शिविर में कुल 122 बच्चों की उपस्थिति दर्ज की गई। शिविर की खास बात यह रही कि बच्चों को एक समान जरूरत के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी स्थिति का विशेषज्ञों से परीक्षण कराकर व्यक्तिगत आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरणों की अनुशंसा की गई।

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विशेषज्ञों ने जांची बच्चों की जरूरत

शिविर में फिजियोथेरेपिस्ट, पी. एंड ओ. विशेषज्ञ एवं ऑडियोलॉजिस्ट की टीम ने बच्चों का परीक्षण एवं आकलन किया। बच्चों की आवश्यकता के आधार पर अलग-अलग सहायक उपकरणों और सेवाओं की अनुशंसा की गई। आकलन में सबसे अधिक 38 बच्चों के लिए श्रवण यंत्र की जरूरत चिह्नित की गई। इसके अलावा 26 बच्चों के लिए एम.आर. किट और 25 बच्चों के लिए व्हील चेयर की अनुशंसा की गई। वहीं 13 बच्चों के लिए एल.वी. किट, नौ बच्चों के लिए कैलीपर और चार बच्चों के लिए ट्राई साइकिल की आवश्यकता बताई गई। एक बच्चे के लिए स्पीच थेरेपी की अनुशंसा की गई है।

छह बच्चों को सदर अस्पताल भेजा गया

शिविर में जांच के दौरान छह ऐसे बच्चे भी चिह्नित किए गए, जिन्हें विशेष चिकित्सीय जांच एवं बेहतर उपचार की आवश्यकता है। इन छह बच्चों को सदर अस्पताल, बांका रेफर किया गया है, ताकि आगे की चिकित्सीय जांच कर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा सके।

निःशुल्क मिलेंगे चिह्नित सहायक उपकरण

समावेशी शिक्षा के समन्वयक ने बताया कि आकलन के आधार पर जिन बच्चों के लिए सहायक उपकरणों की अनुशंसा की गई है, उनके लिए खरीद प्रक्रिया पूरी कर जल्द निःशुल्क उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को केवल उपकरण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उनकी दैनिक कठिनाइयों को कम करते हुए उन्हें शिक्षा से लगातार जोड़े रखना और अधिक आत्मनिर्भर बनाना है। शिविर में पहुंचे बच्चों और उनके अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना की। अब अगला महत्वपूर्ण चरण अनुशंसित उपकरणों को समय पर बच्चों तक पहुंचाने का है, ताकि आकलन में सामने आई जरूरतें वास्तविक सुविधा में बदलें और दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई की राह अधिक सुगम हो सके।

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