
जनप्रतिनिधियों ने क्षेत्र की समस्याओं से कराया अवगत, गर्भवती महिलाओं के संस्थागत प्रसव और प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर दिए निर्देश
खगड़िया। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संचालित राहत, बचाव एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा को लेकर शुक्रवार को समाहरणालय सभाकक्ष में बैठक आयोजित की गई। नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सह प्रभारी सचिव, खगड़िया राहुल कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में जिलाधिकारी विक्रम विरकर सहित जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित विभागों के पदाधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में जिला परिषद अध्यक्ष कृष्णा कुमारी यादव, जदयू जिला उपाध्यक्ष अनुराधा कुशवाहा, भाजपा उपाध्यक्ष शत्रुधन भगत, जिला बीस सूत्री के सदस्य मोहम्मद शहाबुद्दीन, नीलम वर्मा, इंद्र भूषण कुशवाहा, बंदना कुमारी, राजेश कुमार सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में बाढ़ से उत्पन्न स्थिति, राहत एवं बचाव कार्यों तथा स्थानीय आवश्यकताओं की जानकारी जिला प्रशासन को दी। जनप्रतिनिधियों से प्राप्त क्षेत्रीय जानकारी और सुझावों के आधार पर प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को और प्रभावी बनाने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संक्रमण और जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए ब्लीचिंग पाउडर एवं हैलोजन की दवाओं का वितरण कराया जा रहा है। संबंधित पदाधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता एवं स्वास्थ्य से जुड़े आवश्यक उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। आमजन से अपील की गई कि बच्चों को बाढ़ के पानी में जाने से रोकें और बाढ़ के पानी में बच्चों को स्नान न कराएं, ताकि दूषित पानी से होने वाली बीमारियों से बचाव किया जा सके।
प्रभावित क्षेत्रों में चिन्हित गड्ढों एवं अन्य खतरनाक स्थानों को लाल कपड़े अथवा लाल निशान से चिह्नित करने का निर्देश दिया गया, ताकि लोगों को ऐसे स्थानों के प्रति पहले से सचेत किया जा सके।
बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी एवं सिविल सर्जन की ओर से आमजन से अपील की गई कि बीमारी अथवा किसी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में झाड़-फूंक या अप्रमाणित उपचार पर निर्भर न रहें। इसके बजाय नजदीकी स्वास्थ्य उपकेंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अनुमंडल अस्पताल, सदर अस्पताल या अन्य नजदीकी अस्पताल में जाकर चिकित्सकीय परामर्श एवं उचित उपचार प्राप्त करें।
गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर स्वास्थ्य विभाग को विशेष रूप से सतर्क रहने का निर्देश दिया गया। गर्भवती महिलाओं का प्रसव घर पर कराने के बजाय स्वास्थ्य संस्थान में ही कराने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया। एएनएम, जीएनएम, आशा कार्यकर्ताओं एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को संस्थागत प्रसव के महत्व तथा घर पर प्रसव के दौरान उत्पन्न होने वाली संभावित जटिलताओं के बारे में जागरूक करने को कहा गया।
प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव अथवा अन्य आकस्मिक स्वास्थ्य जटिलताओं की स्थिति में समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों एवं आशा कार्यकर्ताओं को सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया।
बैठक में जनप्रतिनिधियों से भी अपील की गई कि गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकता होने पर समय पर स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाने में सहयोग करें। जिन महिलाओं को वाहन अथवा परिवहन की आवश्यकता हो, उनके लिए उपलब्ध सरकारी संसाधनों एवं स्थानीय स्तर पर आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। आपात स्थिति में एम्बुलेंस सेवा के लिए 102 पर संपर्क कर सहायता प्राप्त की जा सकती है।
राहत एवं बचाव कार्यों में विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी विशेष जोर दिया गया। बैठक में अपर समाहर्ता, जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी, सिविल सर्जन, विशेष कार्य पदाधिकारी, वरीय उप समाहर्ता, आपदा प्रबंधन टीम सहित जिले के संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य, स्वास्थ्य सेवाएं, विद्युत आपूर्ति, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता, क्षतिग्रस्त संरचनाओं की स्थिति तथा प्रभावित परिवारों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराने को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। प्रभारी सचिव ने संबंधित पदाधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ राहत एवं पुनर्वास कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा प्रभावित लोगों की आवश्यकताओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत, सुरक्षा और पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध कराने को प्राथमिकता देते हुए सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने पर जोर दिया गया।






