
पिछले एक वर्ष में बाल विवाह नहीं होने की रिपोर्ट और विभागीय सत्यापन के बाद ही मिलेगी ‘बाल विवाह मुक्त पंचायत’ की औपचारिक घोषणा
धोरैया/बांका:- बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ अब पंचायत स्तर पर भी ठोस पहल शुरू हो गई है। महिला एवं बाल विकास निगम, बिहार के दिशा-निर्देशों के तहत धोरैया प्रखंड की ग्राम पंचायत चंदाडीह में विशेष ग्राम सभा आयोजित कर पंचायत को ‘बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत’ बनाने का प्रस्ताव रखा गया। हालांकि, घोषणा की प्रक्रिया को केवल प्रस्ताव तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि वार्ड स्तर पर सर्वेक्षण और विभागीय सत्यापन के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। ग्राम सभा की शुरुआत मुखिया अभय कुमार सिंह ने की। उन्होंने महिला एवं बाल विकास निगम से प्राप्त दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए बाल विवाह मुक्त पंचायत बनाने से संबंधित प्रस्ताव ग्रामीणों के समक्ष रखा। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ सामूहिक भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। ग्राम सभा में मौजूद प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी अनुपम अनुराग ने बाल विवाह मुक्त पंचायत घोषित करने की प्रक्रिया को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि पंचायत के सभी वार्ड सदस्य अपने-अपने वार्डों में गहन सर्वेक्षण करेंगे। सर्वेक्षण के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि पिछले एक वर्ष के भीतर संबंधित क्षेत्र में बाल विवाह का कोई मामला दर्ज या आयोजित तो नहीं हुआ है। वार्ड स्तर से प्राप्त रिपोर्ट के बाद विभागीय स्तर पर जांच और सत्यापन किया जाएगा। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही चंदाडीह पंचायत को औपचारिक रूप से ‘बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत’ घोषित किया जा सकेगा। इस प्रक्रिया से पंचायत की घोषणा को प्रमाणिक और पारदर्शी बनाए रखने पर जोर दिया गया। ग्राम सभा में जिला हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वीमेन, बांका की टीम भी मौजूद रही। जिला मिशन समन्वयक, जेंडर स्पेशलिस्ट और वित्तीय साक्षरता विशेषज्ञ ने ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों को बाल विवाह के सामाजिक और कानूनी दुष्परिणामों की जानकारी दी। साथ ही बाल विवाह की रोकथाम के लिए परिवार, समाज और पंचायत स्तर पर जागरूकता एवं सतर्कता की जरूरत बताई गई। कार्यक्रम पदाधिकारी सतेन्द्र प्रसाद ने सरकार की विभिन्न कल्याणकारी और विकास योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों को दी तथा पात्र लोगों से योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की। विशेष ग्राम सभा में पंचायत प्रतिनिधियों के साथ पंचायत सचिव, सेवा प्रदाता, समाजसेवी और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। बैठक में बाल विवाह को केवल कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य से जुड़ा सामाजिक विषय बताते हुए इसके खिलाफ सामूहिक प्रयास का संकल्प लिया गया। अब चंदाडीह पंचायत में अगला महत्वपूर्ण चरण वार्डवार सर्वेक्षण और सत्यापन का होगा। इसके आधार पर यह तय होगा कि पंचायत को ‘बाल विवाह मुक्त’ घोषित करने की निर्धारित शर्तें पूरी हुई हैं या नहीं।









