
जयपुर थाना कांड संख्या 37/24 में न्यायालय का फैसला, दोनों पर कुल 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड
बांका। जिले में आर्म्स एक्ट से जुड़े एक मामले में न्यायालय ने दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। गुरुवार को न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी भावेश चन्द्र की अदालत में जयपुर थाना कांड संख्या 37/24 की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया गया। मामले में कुलदीप यादव और श्रीकांत यादव को आर्म्स एक्ट की अलग-अलग धाराओं के तहत दंडित किया गया है।
दो धाराओं में सुनाई गई सजा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जयपुर थाना क्षेत्र से संबंधित इस मामले में आरोपी कुलदीप यादव, पिता तनुक यादव, निवासी पेकना, थाना जयपुर, जिला बांका तथा श्रीकांत यादव, पिता दासो यादव, निवासी पतलेखा, थाना जयपुर, जिला बांका को सजा सुनाई गई है। न्यायालय ने दोनों आरोपियों को आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-b)a के तहत तीन वर्ष के साधारण कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। इसके अतिरिक्त, धारा 26(1) आर्म्स एक्ट के तहत भी तीन वर्ष के साधारण कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। इस प्रकार, प्रत्येक आरोपी पर दोनों धाराओं के तहत पांच-पांच हजार रुपये, यानी कुल दस हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। प्रत्येक धारा के तहत तीन वर्ष के साधारण कारावास की सजा भी सुनाई गई है। दोनों सजाओं के एक साथ या अलग-अलग चलने के संबंध में उपलब्ध सूचना में स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है।
वैज्ञानिक साक्ष्य और गवाही की अहम भूमिका
पुलिस अधीक्षक बांका अमितेश कुमार के निर्देशन में मामले के अनुसंधान और अभियोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। सहायक अभियोजन पदाधिकारी जागृति कुमारी की ओर से न्यायालय में प्रस्तुत वैज्ञानिक साक्ष्य, गवाहों की गवाही, गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान और आरोपपत्र के आधार पर मामले की पैरवी की गई। इन्हीं साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को संबंधित धाराओं के तहत दंडित किया।
अपराध नियंत्रण और न्यायिक प्रक्रिया पर जोर
आर्म्स एक्ट से जुड़े इस मामले में आया फैसला पुलिस अनुसंधान, साक्ष्य संकलन और अभियोजन की भूमिका को रेखांकित करता है। किसी भी आपराधिक मामले में ठोस साक्ष्य, गवाहों के बयान और प्रभावी कानूनी पैरवी न्यायालय के समक्ष तथ्य प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बांका जिले में इस फैसले के साथ जयपुर थाना कांड संख्या 37/24 में न्यायिक निर्णय सामने आया है। मामले में आगे की प्रक्रिया न्यायालय के आदेश के अनुसार पूरी की जाएगी।









