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पूर्व सिविल सर्जन का आदेश बेअसर! चार साल बाद भी परबत्ता सीएचसी में ड्यूटी कर रहीं एएनएम, जांच हुई तो खुल सकते हैं कई राज!

* 2022 में 24 घंटे के भीतर मूल पद स्थापना स्थल पर भेजने का आदेश जारी हुआ था, सीसीटीवी फुटेज की जांच से सामने आ सकता है हकीकत*

खगड़िया/खगड़िया जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) परबत्ता में स्वास्थ्य विभाग के एक पुराने आदेश को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मामला एक घंटों से जुड़ा है। तत्कालीन सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्साधी, खगड़िया के कार्यालय से 16 दिसंबर 2022 को जारी पत्र में उन्हें मूल पद स्थापना स्थल पर कार्य करने के लिए विरमित करने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अक्टूबर 2026 तक वह परबत्ता सीएचसी के प्रसव वार्ड में ड्यूटी कर रही हैं।

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* चार साल में बदले अधिकारी, लेकिन सवाल बरकरार!*

 

कार्यालय के ज्ञापांक 3791 से जारी पत्र में परबत्ता सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि संबंधित कर्मियों को 24 घंटे के भीतर मूल पद स्थापन स्थल पर विच्छेद कर कार्रवाई की सूचना दी जाए। पत्र में यह चेतावनी भी दी गई थी कि भविष्य में इस तरह की शिकायत मिलने पर संबंधित प्रभारी की जवाबदेही होगी।

हैरानी की बात यह है कि वर्ष 2022 से 2026 के बीच जिले में कई सिविल सर्जन और परबत्ता सीएचसी में कई चार्ज चिकित्साधी बदल गए, लेकिन कर्मियों के कर्मियों को लेकर सवाल अब भी कायम हैं। अंतिम तत्कालीन आदेश पर क्या कार्रवाई हुई और संबंधित कर्मी को मूल पद स्थापना स्थल पर क्यों नहीं भेजा गया? इन सवालों का जवाब अब तक स्पष्ट नहीं है।

 

सीसीटीवी फुटेज की जांच से सामने आ सकती है सच्चाई!

स्थानीय स्तर पर संबंधित एएनएम को लेकर पूर्व में भी आरोप लगाए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में परबत्ता सीएचसी में उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रोस्टर, उपस्थिति पंजी और पद स्थापना संबंधी गतिविधियों की निष्पक्ष जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

 

डेंगू के नैदानिक ​​परीक्षण पर तय हो सकती है जवाबदेही

यदि एनडीए इस मामले में मनोवैज्ञानिक लेकर जांच करते हैं, तो जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड स्तर तक संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल हो सकती है। अब सवाल यह है कि चार साल पुराने आदेश के अनुपालन की जांच होगी या मामला यूं ही फाइलों में दबा रहेगा? स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठ रही है।

 

दैनिक बिहार पत्रिका खगड़िया संवाददाता।

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