
नई विकास परियोजनाओं से पहले प्रशासन ने शुरू की बड़ी तैयारी; सीओ, अमीन और राजस्व कर्मचारियों को प्रशिक्षण, गलतियों पर शुरुआत में ही अंकुश लगाकर मुकदमों से बचने पर जोर
बांका:- जिले में आने वाली महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को जमीन के कारण वर्षों तक इंतजार न करना पड़े, इसके लिए बांका प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज और त्रुटिरहित बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। बुधवार को समाहर्त्ता, बांका की अध्यक्षता में सभी अंचल अधिकारियों, अंचल अमीन एवं राजस्व कर्मचारियों के लिए “भूमि अधिग्रहण में अंचल की भूमिका” विषय पर उन्मुखीकरण-सह-प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में स्पष्ट किया गया कि जिले में कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं प्रारंभ होने की संभावना है। ऐसे में भूमि अधिग्रहण की पूर्व तैयारी अभी से मिशन मोड में करनी होगी।
तीन वर्ष की प्रक्रिया को एक वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य
समाहर्त्ता ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में किसी परियोजना के लिए भू-अर्जन की प्रक्रिया पूरी होने में करीब तीन वर्ष तक का समय लग जाता है, लेकिन बांका में सामान्य तरीके से काम नहीं करना है। इसके लिए ऐसी कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है, जिससे एक वर्ष के भीतर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जा सके। प्रशासन का प्रयास है कि भू-अर्जन की प्रक्रिया को कम समय में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा कर बांका इस क्षेत्र में बेहतर उदाहरण प्रस्तुत करे। इस दौरान कटोरिया एवं बेलहर के अंचल अधिकारियों द्वारा पूर्व में आवंटित कार्यों के बेहतर निष्पादन की प्रशंसा भी की गई।

शुरुआती जांच मजबूत तो मुकदमों की गुंजाइश होगी कम
कार्यशाला में भू-अर्जन की अधियाचना, मानचित्र तथा 3A और 3D सहित संबंधित दस्तावेजों की जांच एवं सत्यापन की प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को बताया गया कि अंचल स्तर पर शुरुआती जांच जितनी सटीक और गुणवत्तापूर्ण होगी, भविष्य में विवाद एवं न्यायालय में जाने वाले मामलों की संभावना उतनी ही कम होगी। प्रशासन ने लक्ष्य रखा है कि प्रक्रिया इतनी त्रुटिरहित हो कि भू-अर्जन से संबंधित CWJC और Land Suit जैसे मामलों की नौबत न्यूनतम हो। इसके लिए अंचल अधिकारियों एवं कर्मियों को प्रत्येक दस्तावेज का गंभीरता से सत्यापन करने का निर्देश दिया गया।
जमीन के साथ लोगों के हित का भी रखना होगा ध्यान
जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने प्रशिक्षण के दौरान अधियाचना, 3A, 3D एवं मानचित्र सहित भू-अर्जन के विभिन्न चरणों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अधिकारियों और कर्मियों से कहा कि भूमि अधिग्रहण को केवल कागजी प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जाए, बल्कि मानवीय मूल्यों एवं जनहित को ध्यान में रखकर जिम्मेदारी निभाई जाए। उन्होंने कहा कि ईमानदारी और निष्ठा के साथ प्रक्रिया पूरी होने पर विकास योजनाओं को कम समय में और गुणवत्तापूर्ण तरीके से धरातल पर उतारने में मदद मिलेगी। कार्यशाला में अपर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, राजस्व अधिकारी-सह-कानूनगो, जिला भू-अर्जन कार्यालय के वरीय लिपिक, अमीन एवं अनुभवी कर्मियों ने भी विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया। प्रशासन की इस कवायद का सीधा उद्देश्य है—जमीन से जुड़ी प्रक्रिया विकास परियोजनाओं की रफ्तार न रोके; दस्तावेजों की जांच शुरुआत में ही सही हो और भूमि अधिग्रहण का काम समयबद्ध, पारदर्शी तथा जनहित को ध्यान में रखकर पूरा किया जाए।










