
गोगरी और परबत्ता के कई इलाकों का किया निरीक्षण, सड़क-पुलिया की मरम्मत, फसल क्षति आकलन और जल निकासी में तेजी के निर्देश

दैनिक बिहार पत्रिका, खगड़िया । बाढ़ का पानी कम होने के बाद खगड़िया जिले में राहत एवं पुनर्वास कार्यों को प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारने के लिए प्रशासन ने निरीक्षण तेज कर दिया है। इसी क्रम में जिलाधिकारी ने बुधवार को गोगरी और परबत्ता प्रखंड के विभिन्न बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और राहत कार्यों की स्थिति की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान गोगरी के अनुमंडल पदाधिकारी, सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी, जिला कृषि पदाधिकारी सहित संबंधित विभागों के पदाधिकारी मौजूद रहे।

निरीक्षण के क्रम में जिलाधिकारी सबसे पहले गोगरी प्रखंड की बोरना पंचायत और सहनी टोला पहुंचे। यहां उन्होंने स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों से बातचीत कर बाढ़ के बाद उत्पन्न समस्याओं और प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे राहत कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने लोगों की वर्तमान जरूरतों को समझते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

इसके बाद जिलाधिकारी ने इठहरी, कटघरा और भुरिया सहित अन्य क्षेत्रों का दौरा किया। इन इलाकों में जलजमाव और नदियों के जलस्तर की स्थिति का जायजा लिया गया। बाढ़ के कारण आवागमन प्रभावित करने वाली क्षतिग्रस्त सड़क और पुल-पुलियों का भी निरीक्षण किया गया। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक मरम्मत कार्य में तेजी लाकर यातायात को जल्द से जल्द सुचारू कराने का निर्देश दिया। वहीं जिला कृषि पदाधिकारी को बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान का पंचायतवार सटीक आकलन कर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया, ताकि प्रभावित किसानों को सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो।

इसके बाद जिलाधिकारी परबत्ता प्रखंड के विभिन्न बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे। विशेष रूप से बावन कोठी और आसपास के इलाकों में उन्होंने स्थानीय लोगों से बातचीत की तथा बाढ़ का पानी कम होने के बाद की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने बाढ़ पश्चात की तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को जल निकासी के कार्य में युद्ध स्तर पर तेजी लाने का निर्देश दिया, ताकि जलजमाव के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा कम किया जा सके।
जिलाधिकारी ने पूरे प्रभावित क्षेत्र में सघन रूप से ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव सुनिश्चित करने के साथ-साथ पेयजल की शुद्धता पर भी विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। चापाकलों और अन्य जल स्रोतों की जल गुणवत्ता जांच कराने के लिए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) और स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया।
निरीक्षण के दौरान डूबने की घटनाओं को रोकने को लेकर भी जिलाधिकारी ने अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद कई स्थानों पर पानी के नीचे गहरे गड्ढे बन जाते हैं, जो लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। ऐसे स्थानों को चिन्हित कर वहां लाल झंडी अथवा बैरिकेडिंग लगाने के साथ व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया।
जिलाधिकारी ने आम लोगों से जलजमाव वाले क्षेत्रों और गहरे पानी में जाने से बचने की अपील की। उन्होंने बच्चों को नदियों, गड्ढों और अन्य जलभराव वाले स्थानों से दूर रखने तथा आवागमन के दौरान केवल सुरक्षित नावों का उपयोग करने पर जोर दिया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने स्थानीय मछुआरों से भी मुलाकात की। उन्होंने मत्स्य पालन को बढ़ावा देने, वैज्ञानिक तरीके से मछली उत्पादन विकसित करने और मछुआरों की आजीविका को और मजबूत बनाने को लेकर उनके साथ चर्चा की।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि आपदा प्रबंधन, सड़क-पुल-पुलिया के पुनर्निर्माण, जल निकासी और किसानों की फसल क्षति के आकलन में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों की सुरक्षा, सुविधा और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।






