
खगड़िया। जिले के सभी महाविद्यालयों की संबद्धता मुंगेर विश्वविद्यालय से यथावत रखने की मांग को लेकर खगड़िया विधानसभा क्षेत्र के विधायक बबलू कुमार मंडल ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र भेजा है।विधायक ने पत्र के माध्यम से छात्र-छात्राओं की सुविधा,समय और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए जिले के महाविद्यालयों को मुंगेर विश्वविद्यालय से ही संबद्ध रखने का आग्रह किया है।

विधायक बबलू कुमार मंडल ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि खगड़िया जिला शिक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।जिले के विभिन्न महाविद्यालयों में सभी वर्गों के छात्र- छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने भविष्य का निर्माण कर रहे हैं।वर्तमान में जिले के महाविद्यालय मुंगेर विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं,जिससे विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय से संबंधित शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यों के लिए अपेक्षाकृत कम दूरी तय करनी पड़ती है।
पत्र में कहा गया है कि दिनकर विश्वविद्यालय की स्थापना के प्रस्ताव के मद्देनजर खगड़िया जिले के महाविद्यालयों को दिनकर विश्वविद्यालय से संबद्ध किए जाने की चर्चा है।ऐसे में विधायक ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि जिले के सभी महाविद्यालयों की संबद्धता मुंगेर विश्वविद्यालय से ही यथावत रखी जाए।

विधायक ने पत्र में विद्यार्थियों की व्यावहारिक कठिनाइयों का भी उल्लेख किया है।उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में खगड़िया के छात्र- छात्राओं को विश्वविद्यालय से संबंधित कार्यों के लिए लगभग 27 किलोमीटर की दूरी तय कर मुंगेर जाना पड़ता है।इससे विद्यार्थियों को कम समय और कम खर्च में अपने शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्य संपन्न करने में सुविधा मिलती है।
उन्होंने कहा कि यदि जिले के महाविद्यालयों की संबद्धता किसी दूसरे विश्वविद्यालय से की जाती है तो विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय संबंधी कार्यों के लिए अधिक दूरी तय करनी पड़ सकती है।इससे उनके आने-जाने में अतिरिक्त समय और आर्थिक खर्च बढ़ेगा।विशेष रूप से ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए यह अतिरिक्त बोझ हो सकता है।
विधायक बबलू कुमार मंडल ने मुख्यमंत्री से छात्रहित,शैक्षणिक सुविधा और विद्यार्थियों की आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए खगड़िया जिले के सभी महाविद्यालयों की संबद्धता मुंगेर विश्वविद्यालय से ही बनाए रखने के संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की संबद्धता से जुड़े किसी भी निर्णय में विद्यार्थियों की सुविधा और स्थानीय परिस्थितियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए,ताकि उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।


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