
रिपोर्ट:- उमाकांत पोद्दार।
चांदन/बांका:- जमुई जिला सीमा पर स्थित सिमुलतला के अन्या रेस्टोरेंट में गुरुवार को हिंदी फिल्म जगत के चर्चित लेखक, पटकथा एवं संवाद लेखक, निर्देशक, निर्माता और अभिनेता इकबाल दुर्रानी ने मीडिया के समक्ष अपना परिचय साझा करते हुए अपने जीवन के संघर्ष और फिल्मी सफर से लेकर सामवेद के उर्दू अनुवाद तक की यात्रा के बारे में विस्तार से जानकारी दी।दुर्रानी ने बताया कि उनका संबंध बांका की धरती से रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनका जन्म बांका जिले के बलवतारी क्षेत्र में हुआ था। बाद में उनका परिवार गोड्डा चला गया, जहां उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने चाईबासा में पढ़ाई की और टाटा कॉलेज, चाईबासा से उच्च शिक्षा से जुड़े। आगे चलकर बेहतर भविष्य की तलाश में वे मुंबई पहुंचे और फिल्म जगत में अपना करियर बनाने के लिए संघर्ष शुरू किया।फिल्मी दुनिया में आने से पहले दुर्रानी ने पत्रकारिता से अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उनका रुझान फिल्म लेखन की ओर हुआ। वर्ष 1988 में कालचक्र से बतौर लेखक उनके फिल्मी सफर की शुरुआत बताई जाती है। इसके बाद उन्होंने शिवा, मजबूर, सौगंध, फूल और कांटे, दिल आशना है, खुद्दार, धरतीपुत्र, बेताज बादशाह, कोहराम, मिट्टी सहित कई फिल्मों में लेखन, पटकथा, संवाद और निर्देशन से जुड़े कार्य किए।अपने पारिवारिक संस्कारों का उल्लेख करते हुए इकबाल दुर्रानी ने बताया कि उनके दादा मोकामा में संस्कृत के शिक्षक थे और स्थानीय लोग उन्हें सम्मानपूर्वक “पंडित जी” के नाम से जानते थे। दादा के संस्कृत और साहित्य से जुड़े संस्कारों का प्रभाव उनके जीवन पर पड़ा। इसी जुड़ाव को उन्होंने सामवेद जैसे प्राचीन ग्रंथ को समझने और उसे उर्दू में प्रस्तुत करने की प्रेरणा से जोड़ा।

दुर्रानी ने बताया कि सामवेद के उर्दू अनुवाद को तैयार करने में करीब छह वर्षों की मेहनत लगी। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा और प्राचीन ग्रंथ की विषयवस्तु को अधिक व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि ग्रंथ में ऐसी अनेक बातें हैं, जिनका अध्ययन सभी वर्गों के लोग कर सकते हैं और इससे लोगों को कुछ सीखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि तैयार ग्रंथ का वजन करीब साढ़े तीन किलोग्राम है और इसकी बाजार कीमत चार हजार रुपये से अधिक है। बिहार के इच्छुक पाठकों को इसे करीब तीन हजार रुपये में उपलब्ध कराने की बात भी उन्होंने कही। दैनिक बिहार पत्रिका संवाददाता उमाकांत पोद्दार से खास बातचीत में इकबाल दुर्रानी ने अपने फिल्मी सफर, सामवेद के उर्दू अनुवाद और सिमुलतला से अपने जुड़ाव को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि फिल्म जगत में लेखन से शुरू हुआ उनका सफर निर्देशन और निर्माण तक पहुंचा और अब सामवेद के माध्यम से वे भारतीय ज्ञान परंपरा को अलग भाषा के पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।उन्होंने बताया कि ग्रंथ के विमोचन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मोहन भागवत सहित कई प्रमुख हस्तियों से अनुशंसा प्राप्त हुई है। इस संबंध में उनके द्वारा कही गई बातों को उन्होंने मीडिया के समक्ष साझा किया।इकबाल दुर्रानी ने बांका, झारखंड और आसपास के क्षेत्र से अपने भावनात्मक जुड़ाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने क्षेत्र की मिट्टी, संस्कृति और प्राकृतिक परिवेश से अपने संबंध को रेखांकित करते हुए स्वयं को “मंदार पुरुष” कहे जाने की बात कही।जानकारी के अनुसार दुर्रानी करीब 10 दिनों तक सिमुलतला में रहेंगे। इस दौरान वे क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, स्थानीय परिवेश और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े संभावित पहलुओं का अवलोकन करेंगे। बांका-जमुई सीमा पर स्थित सिमुलतला अपने प्राकृतिक और पहाड़ी वातावरण के कारण लंबे समय से चर्चित है और इसे “मिनी शिमला” के नाम से भी जाना जाता है। क्षेत्र में कई बड़े नेता, मंत्री और फिल्म जगत से जुड़े लोग भी समय-समय पर पहुंचते रहे हैं।मौके पर अन्या रेस्टोरेंट के प्रोपराइटर एवं सिने जगत से जुड़े अभिनेता फेबियन चार्ल्स वुड सहित अन्य लोग मौजूद थे। दुर्रानी ने फेबियन चार्ल्स वुड की सराहना करते हुए उन्हें अपने परिवार के एक अंग के समान बताया।











