
शारदीय नवरात्र पर मंदिरों में पूजा-अर्चना का माहौल, सुख-समृद्धि और शांति की कामना के साथ भक्तों ने किया मां का स्मरण
बौंसी/बांका:- शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन मंगलवार को बौंसी प्रखंड में भक्ति और आस्था का माहौल देखने को मिला। नवरात्र के इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की। सुबह से ही भक्तों के बीच धार्मिक उत्साह बना रहा और लोगों ने मां का स्मरण कर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की। नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। इसी परंपरा के तहत तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा साहस, शक्ति और निर्भयता की प्रतीक हैं। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार की घंटी होने के कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। भक्त मानते हैं कि मां की आराधना से मन में आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
पूजा-अर्चना के साथ मां से की सुख-शांति की प्रार्थना
बौंसी क्षेत्र में नवरात्र को लेकर श्रद्धालुओं के बीच उत्साह दिखाई दिया। भक्तों ने विधि-विधान से मां की पूजा कर उन्हें नमन किया। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने अपने परिवार और समाज की खुशहाली के साथ जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना की। नवरात्र के दौरान वातावरण में

धार्मिक आस्था और आध्यात्मिकता की अनुभूति बनी हुई है। मां चंद्रघंटा की आराधना को शक्ति की उपासना का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मां अपने भक्तों को भय और नकारात्मकता से लड़ने की प्रेरणा देती हैं। यही कारण है कि नवरात्र के तीसरे दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व है।
नवरात्र से धार्मिक चेतना और परंपरा को मिलती है मजबूती
शारदीय नवरात्र केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामूहिक आस्था से जुड़ा उत्सव भी है। इन दिनों श्रद्धालु मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना कर शक्ति, संयम और सद्भाव का संदेश ग्रहण करते हैं। बौंसी में भी नवरात्र का यह अवसर लोगों को धार्मिक परंपराओं से जोड़ रहा है। नवरात्र के आगामी दिनों में मां दुर्गा के अन्य स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। श्रद्धालु पूरे उत्साह और विश्वास के साथ इस पावन पर्व को मना रहे हैं।






