खगड़िया/परबत्ता मे खेती-किसानी में नए प्रयोग और मेहनत के दम पर किसान अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। इसकी एक मिसाल परबत्ता प्रखंड के कुल्हड़िया गांव निवासी किसान रामप्रवेश शर्मा पेश कर रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से मखाना की खेती कर रहे हैं और पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर कृषि के एक नए विकल्प को अपना रहे हैं। उनकी यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है।
आमतौर पर खगड़िया जिले के किसान धान, गेहूं, मक्का जैसी पारंपरिक फसलों की खेती पर अधिक निर्भर रहते हैं। लेकिन बदलते समय के साथ खेती में नए प्रयोग की जरूरत भी महसूस की जा रही है। इसी सोच के साथ रामप्रवेश शर्मा ने मखाना की खेती को अपनाया। लगातार तीन वर्षों से इस खेती से जुड़े रहकर वे अपने अनुभव और मेहनत के जरिए मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने में जुटे हैं।
मखाना की खेती को लेकर क्षेत्र में किसानों के बीच धीरे-धीरे रुचि बढ़ने की संभावना है। रामप्रवेश शर्मा का प्रयास यह संदेश दे रहा है कि किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ वैकल्पिक खेती को अपनाकर कृषि के नए रास्ते तलाश सकते हैं। हालांकि, इसके लिए उपयुक्त जल प्रबंधन, बेहतर तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और कृषि विशेषज्ञों का मार्गदर्शन भी जरूरी है।
कुल्हड़िया गांव में रामप्रवेश शर्मा की यह पहल स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। उनकी खेती को देखकर दूसरे किसान भी मखाना उत्पादन की संभावनाओं पर विचार कर सकते हैं।
कृषि क्षेत्र में ऐसे नवाचार न केवल किसानों को नई दिशा देते हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
दैनिक बिहार पत्रिका गुरुदेव कुमार।



