खगड़िया शिक्षा विभाग का घोटाला! परीक्षा में नहीं, मगर मूल्यांकन में कूद पड़े विवादित शिक्षक

बिना परीक्षा केंद्र बने ‘आर्य कन्या उच्च विद्यालय’ को मिला मूल्यांकन केंद्र का दर्जा, गोपनीयता और निष्पक्षता पर सवाल

बिहार का शिक्षा विभाग फिर से कटघरे में खड़ा हो गया है! खगड़िया जिले में माध्यमिक वार्षिक परीक्षा मूल्यांकन केंद्रों के चयन में जबरदस्त धांधली उजागर हुई है। नियमों को ताक पर रखते हुए, ऐसे विद्यालय को मूल्यांकन केंद्र बना दिया गया, जिसे परीक्षा केंद्र तक नहीं बनाया गया था।

आर्य कन्या उच्च विद्यालय, जो प्रशासनिक विवादों और अनियमितताओं में घिरा हुआ है, को मूल्यांकन केंद्र के रूप में चयनित कर लिया गया। यही नहीं, इस विद्यालय के विवादित प्रधानाध्यापक शैलेश कुमार और शिक्षिका रूबी कुमारी को मूल्यांकन केंद्र प्रभारी बना दिया गया, जबकि इन पर पहले से ही जांच चल रही है!

क्या योग्यता मायने नहीं रखती?

  • विभागीय नियमों के अनुसार, केवल नियमित और वरीय शिक्षकों को मूल्यांकन निदेशक बनाया जाना चाहिए।
  • लेकिन खगड़िया शिक्षा विभाग ने इस नियम को धता बताते हुए, एक अनुभवी और वरिष्ठ शिक्षक अशोक कुमार सुमन को दरकिनार कर दिया और उसकी जगह एक कनिष्ठ शिक्षिका सोनी कुमारी को मूल्यांकन निदेशक बना दिया गया।
  • सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि रूबी कुमारी ने आज तक 10वीं की परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं जांची भी नहीं हैं, फिर भी उन्हें मूल्यांकन निदेशक की बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी गई!

यज्ञ के बीच होगी कॉपी जांच! मूल्यांकन की गोपनीयता पर खतरा

आर्य कन्या उच्च विद्यालय इन दिनों किसी परीक्षा केंद्र से ज्यादा, एक धार्मिक आयोजन स्थल बना हुआ है। स्कूल परिसर में बड़े पैमाने पर यज्ञ हो रहा है, जहां हजारों श्रद्धालु हर दिन आते-जाते रहते हैं।

  • परीक्षा नियमों के अनुसार, मूल्यांकन केंद्र के 100 मीटर के दायरे में भीड़भाड़ नहीं होनी चाहिए, लेकिन यहां इस नियम की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
  • मूल्यांकन केंद्र पर इस तरह की अराजकता गोपनीयता और निष्पक्ष मूल्यांकन पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

‘हम नहीं सुधरेंगे’ वाली मानसिकता में खगड़िया शिक्षा विभाग?

शिक्षा विभाग पर पहले भी अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन इस बार तो मामला पूरी तरह से शिक्षा माफियाओं के खेल की ओर इशारा कर रहा है।

  1. बिना परीक्षा केंद्र बनाए किसी विद्यालय को मूल्यांकन केंद्र बनाना सीधा नियमों का उल्लंघन है।
  2. योग्य और अनुभवी शिक्षकों को हटाकर, जांच के घेरे में चल रहे शिक्षकों को बड़ी जिम्मेदारी देना एक साजिश नहीं तो और क्या है?
  3. यज्ञ स्थल पर मूल्यांकन केंद्र बनाए जाने से गोपनीयता और निष्पक्षता पर खतरा मंडरा रहा है।

क्या इस घोटाले पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी दफन हो जाएगा?

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि खगड़िया के जिलाधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी इस धांधली पर कोई ठोस कदम उठाएंगे, या फिर यह मामला फाइलों में दफन होकर रह जाएगा?

क्या बिहार की शिक्षा व्यवस्था इसी तरह घोटालों और सिफारिशों के जाल में फंसकर दम तोड़ती रहेगी? या फिर कोई अधिकारी इस मामले को संज्ञान में लेकर दोषियों पर कार्रवाई करेगा? जवाबदेही तय होगी या फिर बिहार का शिक्षा विभाग अपने ‘हम नहीं सुधरेंगे’ वाले रवैये पर कायम रहेगा?

रिपोर्ट: प्रवीण कुमार प्रियांशु, दैनिक बिहार पत्रिका 

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