कुसुमजोरी पंचायत की जल संकट पर प्रशासन खामोश
चांदन/बांका। भीषण गर्मी और तपती दोपहरी में चांदन प्रखंड के कुसुमजोरी पंचायत के वार्ड संख्या 10 के ग्रामीण एक-एक बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। सात निश्चय योजना के तहत बना जलमीनार विभागीय लापरवाही का शिकार हो गया है। नतीजा यह है कि पिछले एक महीने से इलाके में जल आपूर्ति पूरी तरह से ठप है।
न घर में पानी, न मवेशियों के लिए राहत
सैकड़ों परिवारों के समक्ष पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीण महिलाएं और बच्चे पानी की तलाश में इधर-उधर भटकते नजर आ रहे हैं, जबकि पशुपालकों को मवेशियों को पानी पिलाने में भारी दिक्कतें हो रही हैं।
प्रीपेड मीटर बना बाधा, दो चापाकल भी बेअसर
ग्रामीणों ने बताया कि जलमीनार शुरू से ही नियमित आपूर्ति देने में विफल रहा है। कभी मोटर खराब, कभी स्टार्टर जला, और अब प्रीपेड मीटर की वजह से संकट और गहरा गया है। पिछले एक महीने से मीटर का रिचार्ज नहीं होने के कारण पानी सप्लाई पूरी तरह बंद है।
वार्ड में मौजूद दो चापाकल भी सूख चुके हैं, क्योंकि जल स्तर बहुत नीचे चला गया है।
पंप संचालक ने दी चेतावनी, विभाग बना अनसुना
पंप संचालक अनिल दास ने बताया कि जब से प्रीपेड मीटर लगाया गया है, तब से समस्या लगातार बनी हुई है। कई बार पीएचडी विभाग को सूचित किया गया, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली।
इधर, बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता राजीव कुमार ने भरोसा दिलाया है कि जल्द ही प्रीपेड मीटर रिचार्ज कर सप्लाई बहाल कर दी जाएगी।
ग्रामीणों की मांग– विभाग हर सप्ताह करे निगरानी
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जलमीनार की नियमित निगरानी हो और प्रीपेड मीटर सहित सभी तकनीकी दिक्कतों का समय पर समाधान किया जाए, ताकि उन्हें हर साल गर्मियों में ऐसे हालातों का सामना न करना पड़े।
अब देखना यह है कि प्रशासन सिर्फ बयान देता है या जमीनी कार्रवाई भी होती है।
रिपोर्ट: उमाकांत साह, दैनिक बिहार पत्रिका
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