200 साल पुराने कब्रिस्तान पर ट्रैक्टर चला किया गया जमींदोज! पूर्व मुखिया समेत 35 पर केस, लेकिन चार दिन से प्रशासन मौन

सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज अनुमंडल क्षेत्र से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने पूरे इलाके में आग की तरह तनाव फैला दिया है। गोनाहा पंचायत स्थित दो सौ साल पुराने पंजीकृत कब्रिस्तान की जमीन पर एक समुदाय विशेष के लोगों ने गुपचुप तरीके से ट्रैक्टर चलवाकर कब्रों को मिट्टी में मिला दिया। हैरानी की बात यह है कि इस शर्मनाक हरकत के चार दिन बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पीड़ित समुदाय अब प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल उठाते हुए खुली साजिश और मिलीभगत का आरोप लगा रहा है।

बताया जाता है कि यह कब्रिस्तान गैर मजरुआ आम खास भूमि के रूप में राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है और तीन महीने पूर्व मनरेगा योजना से इसकी बाउंड्री का कार्य शुरू हुआ था। लेकिन अचानक एक दिन दूसरे समुदाय के लोगों ने इस पवित्र जमीन को कब्जा करने की नीयत से ट्रैक्टर चला दिया। जब तक पुलिस मौके पर पहुंचती, तब तक दर्जनों कब्रें रौंद दी गई थीं और धार्मिक अस्मिता को ठेस पहुंच चुकी थी। घटना के बाद पूरे इलाके में जबरदस्त तनाव फैल गया।

इस मामले में मोहम्मद हमीद की शिकायत पर त्रिवेणीगंज थाना में पूर्व मुखिया सुबोध शाह समेत चार नामजद और 30-35 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मुस्लिम समुदाय का आरोप है कि यह सारा कृत्य योजनाबद्ध तरीके से किया गया है, जिसमें स्थानीय नेता छोट भैया और कुछ प्रशासनिक अधिकारी जैसे अंचलाधिकारी प्रियंका सिंह और आरओ राकेश कुमार की भूमिका संदिग्ध है। लोगों का दावा है कि आरोपियों का इस कब्रिस्तान से कोई सीधा संबंध नहीं है, फिर भी जबरन कब्जा जमाने के लिए इस तरह की घिनौनी हरकत की गई।

एसडीएम अभिषेक कुमार और डीएसपी विपिन कुमार खुद मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश में लगे हैं। दंडाधिकारी और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। थानाध्यक्ष रामसेवक रावत ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और छापेमारी की जा रही है। लेकिन चार दिन बाद भी एक भी गिरफ्तारी न होना प्रशासनिक रवैये पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम के बावजूद मुस्लिम समुदाय ने शांति, संयम और सौहार्द्र का परिचय दिया है। लेकिन सवाल अब भी खड़े हैं — क्या धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं रही? क्या कब्रों तक को राजनीतिक और जातीय साजिशों की बलि चढ़ाया जाएगा? और क्या प्रशासन सचमुच तटस्थ है या किसी दबाव में मौन?

इस घटना ने न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया है, बल्कि सामाजिक सौहार्द्र के ताने-बाने को भी झकझोर कर रख दिया है। यदि दोषियों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आग किसी भी वक्त विकराल रूप ले सकती है।

रिपोर्ट : पप्पू आलम, दैनिक बिहार पत्रिका, सुपौल 

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