रिपोर्ट: नैयर आलम, दैनिक बिहार पत्रिका
बेलदौर/खगड़िया। बिजली विभाग की लापरवाही ने एक आम उपभोक्ता को आर्थिक संकट में डाल दिया है। बेलदौर प्रखंड के इतमादी स्वर्णपुरी गांव के निवासी अमर सिंह के साथ बिजली विभाग ने जो किया, वह न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल भी खड़े करता है।
करीब 10 वर्षों पहले अमर सिंह ने बिजली कनेक्शन लिया था। तब से अब तक कभी भी बिजली विभाग के कर्मी उनके घर मीटर रीडिंग लेने नहीं पहुंचे। विभाग हर महीने उन्हें औसतन यानी एवरेज बिल भेजता रहा, जिसे अमर सिंह ईमानदारी से ऑनलाइन भुगतान करते रहे। लेकिन कुछ माह पूर्व जब उन्होंने स्मार्ट मीटर लगाने की मांग की, तो अधिकारी पहुंचे और अचानक बता दिया कि उनके ऊपर ₹27,000 का बकाया है।
यह सुनते ही अमर सिंह के होश उड़ गए। उन्होंने कहा कि विभाग की गलती का खामियाजा उन्हें क्यों भुगतना चाहिए? उनका कहना है कि वे साल के छह महीने गांव में और छह महीने बाहर राज्य में रहते हैं, जिससे बिजली की खपत भी सीमित होती है। बावजूद इसके अब विभाग की लापरवाही का बोझ उन पर डाल दिया गया है।
अमर सिंह का यह भी आरोप है कि बिजली विभाग शुरू में एवरेज बिल भेजता है और जब मोटी रकम जमा हो जाती है, तब उपभोक्ताओं को धमकाना शुरू कर देता है। उन्हें लाइन काटने की चेतावनी और एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दी जा रही है ताकि वे डरकर पूरा पैसा जमा कर दें।
इस पूरे मामले पर विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता गोपाल कुमार ने कहा है कि मामले की जांच करवाई जा रही है। यदि मीटर रीडिंग में गड़बड़ी या विभागीय लापरवाही पाई जाती है, तो दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी और उपभोक्ता के बिल में आवश्यक सुधार भी किया जाएगा।
यह मामला सिर्फ अमर सिंह का नहीं, बल्कि ऐसे हजारों उपभोक्ताओं का है जो विभाग की ‘एवरेज बिलिंग नीति’ की चपेट में आकर आर्थिक रूप से टूट रहे हैं। अब सवाल यह है कि क्या उपभोक्ताओं को न्याय मिलेगा या फिर वे विभाग की मनमानी का शिकार बनते रहेंगे?
Author: दैनिक बिहार पत्रिका
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