बिहार पत्रिका। अमित कुमार झा Bihar Breaking News
विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला के सोमवार को भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए सुल्तानगंज गंगा घाट से जल लाने वाले कांवरियों की भीड़ बढ़ती जा रही है। कांवरियों का अनूठा रंग मार्ग में देखने को लगातार मिल रहा है। ऐसा ही एक अद्भुत नजारा श्रावणी मेला में देखने को मिल रहा है।
झारखंड धनबाद की कांवरिया पुत्र प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होने के बाद अपने पुत्र को कंधे पर बिठाकर पैदल बाबाधाम जा रही है। शादी के बाद पुत्र रत्न प्राप्त करने के लिए पहले बाबा शिव जी की आराधना की, बाबा ने मनोकामना पूरा किया तो अपने बच्चे को सुल्तानगंज से कंधे पर बिठाकर 105 किमी दूर बाबा बैद्यनाथ को प्रत्येक वर्ष जलार्पण करने को पहुंच रही है धनबाद की कांवरिया।
हालांकि कंधे पर बच्चे को लेकर डगर जा रही महिला बम काफी ज्यादा थकी होने के बावजूद भी बोलबम बोलबम बोलते हुए बाबाधाम के लिए प्रस्थान कर रही थी। इस दौरान धनबाद की काजल बम कहती हैं कि बाबा ने मनोकामना पूर्ण की है तो हमलोग बाबाधाम जा रहे हैं।
मनोकामना के बारे में बताते हुए कहती है कि मुझे शादी के 5 साल बाद तक पुत्र रत्न की प्राप्ति नहीं हुई थी, तब मैंने भोले बाबा को याद किया की अगर मेरा कोख भर जाएगा और जब पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी तो उसे अपने कंधे पर लेकर प्रत्येक वर्ष सुल्तानगंज से जल भरकर देवघर तक पैदल जाएंगे।
अपने बच्चों को कंधे पर ले जाती झारखंड के धनबाद जिला की गोविंदपुर गांव निवासी गीता बम ने बताया कि मैं सावन में प्रत्येक वर्ष अपने बच्चों को कंधे पर लेकर देवघर जाती हूं। बाबा से पुत्र रत्न की मनोकामना मांगी थी जो पूर्ण हो गया है। कोविड-19 के कारण पिछले 03 वर्षों से नहीं जा पाई थी। मगर इस बार पूरे जोश और उत्साह के बीच अपने पूरे परिवार के साथ बच्चों को अपने कंधे पर लेकर देवघर जलार्पण करने जा रही हूं।
Author: दैनिक बिहार पत्रिका
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