भागलपुर में भू-माफिया सक्रिय, नेता और समाजसेवी के नकाब में मारवाड़ी समाज के कुछ लोग शामिल

भागलपुर (दैनिक बिहार पत्रिका)। भागलपुर में भू-माफियाओं का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस गिरोह में खुद को नेता और समाजसेवी बताने वाले मारवाड़ी समाज के कुछ प्रभावशाली लोग भी सक्रिय हैं। ये लोग जमीन के सौदों में फर्जीवाड़ा, दबाव, और धमकी जैसे हथकंडों का इस्तेमाल कर लाखों-करोड़ों रुपये की ठगी कर रहे हैं।

रजिस्ट्री के नाम पर धोखाधड़ी और धमकी का खेल

सूत्रों के मुताबिक, ये भू-माफिया पहले तो लोगों को आकर्षक जमीन सौदों का लालच देते हैं। जब रजिस्ट्री का समय आता है, तो वे धौंस और दबाव बनाकर सौदे में बदलाव करने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि पीड़ितों से जबरन अधिक पैसे वसूले जाते हैं और विरोध करने पर उन्हें जान से मारने तक की धमकी दी जाती है।

किसके दम पर इतने बेखौफ हैं भू-माफिया?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन भू-माफियाओं के पीछे किसका संरक्षण है? क्या ये लोग अपने राजनीतिक संपर्कों और प्रशासनिक पहुंच के दम पर इतने बेखौफ हैं? क्या इसमें प्रशासन और सत्ता से जुड़े लोग भी कहीं न कहीं शामिल हैं?

कई पीड़ितों का कहना है कि जब उन्होंने इस तरह के मामलों की शिकायत की, तो उन्हें या तो अनदेखी का सामना करना पड़ा या फिर उल्टा डराया-धमकाया गया।

पीड़ितों की चुप्पी: डर या मजबूरी?

अधिकतर पीड़ित लोग इस डर से खुलकर सामने नहीं आ पाते कि कहीं उनके परिवार को नुकसान न हो। कुछ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब उन्होंने आवाज उठाने की कोशिश की, तो उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज करवाने की धमकी दी गई।

प्रशासन की भूमिका पर सवाल

भागलपुर के कई क्षेत्रों में इस तरह के मामलों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन प्रशासन की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है। क्या यह लापरवाही है या मिलीभगत?

क्यों नहीं हो रही है भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई?

आखिर किसके इशारे पर चल रहा है यह गोरखधंधा?

जनता की मांग: न्याय और कार्रवाई

भागलपुर के जागरूक नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता मांग कर रहे हैं कि:

1. स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।

2. दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

3. पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि वे खुलकर अपनी बात रख सकें।

भागलपुर जैसे ऐतिहासिक और व्यापारिक शहर में इस तरह की घटनाएं न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती हैं, बल्कि यह भी दिखाती हैं कि राजनीति, अपराध, और प्रशासन के गठजोड़ ने किस हद तक समाज को जकड़ रखा है।

रिपोर्ट: कृष्णा टेकरीवाल

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