सेमिनार में मिथकों को तोड़ने पर दिया गया जोर, भेदभाव छोड़ इलाज अपनाने की अपील

Bihar News, गयाजी — शहर के स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र के सभागार में “कुष्ठ रोग: मिथक और वास्तविकता” विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का मुख्य उद्देश्य कुष्ठ रोग से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों को दूर करना तथा आमजन को इसके वैज्ञानिक एवं चिकित्सकीय तथ्यों से अवगत कराना रहा। कार्यक्रम में स्वास्थ्यकर्मियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं आम नागरिकों ने सक्रिय सहभागिता की।
सेमिनार की शुरुआत वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. रामावतार सिंह ने अपने संबोधन से की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कुष्ठ रोग किसी दैवीय प्रकोप या पाप का परिणाम नहीं, बल्कि माइकोबैक्टीरियम लेप्री नामक जीवाणु से होने वाली एक संक्रामक बीमारी है। उन्होंने बताया कि यदि इस रोग की पहचान प्रारंभिक अवस्था में हो जाए तो यह पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है और रोगी सामान्य व सम्मानजनक जीवन जी सकता है।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने समाज में कुष्ठ रोगियों के प्रति व्याप्त भेदभाव, डर और गलत धारणाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। विशेषज्ञों ने बताया कि कुष्ठ रोग छूने, साथ बैठने या एक साथ भोजन करने से नहीं फैलता। नियमित मल्टी-ड्रग थेरेपी (एमडीटी) लेने से रोगी कुछ ही समय में गैर-संक्रामक हो जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि समय पर इलाज नहीं होने से होने वाली शारीरिक दिव्यांगता को जागरूकता, शीघ्र पहचान और उचित उपचार के माध्यम से रोका जा सकता है। सेमिनार के अंत में उपस्थित सभी लोगों को कुष्ठ मुक्त भारत की शपथ दिलाई गई।
मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि हमें रोगियों से नहीं, बल्कि रोग से लड़ने की आवश्यकता है। समाज में जागरूकता फैलाकर ही कुष्ठ रोग से जुड़े सामाजिक कलंक को समाप्त किया जा सकता है। कार्यक्रम का समापन जन-जागरूकता को और अधिक सशक्त बनाने के संकल्प के साथ किया गया।
रिपोर्ट: धीरज गुप्ता, दैनिक बिहार पत्रिका
Author: दैनिक बिहार पत्रिका
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