लूट नहीं, सुपारी किलिंग निकली वारदात; 34 दिन बाद पुलिस ने किया बड़ा खुलासा, एमवीआई पर निलंबन की कार्रवाई शुरू

सुपौल/कटिहार। बिहार के चर्चित चलती ट्रेन हत्याकांड में पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया है कि यह लूटपाट नहीं, बल्कि सुनियोजित सुपारी किलिंग थी। मामले में मृतक की पत्नी, उसके कथित प्रेमी और कथित शूटर समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, पति को रास्ते से हटाने के लिए चार लाख रुपये में हत्या की साजिश रची गई थी।
पुलिस के मुताबिक, मृतक देव कुमार गुंजन बिजली विभाग में ग्रेड-1 टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत थे, जबकि उनकी पत्नी स्मिता कुमारी सुपौल में मोटर वाहन निरीक्षक (एमवीआई) के पद पर तैनात थीं। वर्ष 2017 में बिजली विभाग में नौकरी के दौरान स्मिता, देव कुमार और अजीत कुमार एक साथ कार्यरत थे। बाद में वर्ष 2018 में देव कुमार और स्मिता ने विवाह कर लिया और उनके यहां एक बेटी का जन्म हुआ।
रेल पुलिस के अनुसार, समय के साथ स्मिता और पूर्व सहकर्मी अजीत कुमार के बीच कथित रूप से नजदीकियां बढ़ीं और दोनों ने देव कुमार को रास्ते से हटाने की साजिश रची।
चलती ट्रेन में मारी गई थी गोली
11 जून 2026 को देव कुमार गुंजन जनसाधारण एक्सप्रेस से सुपौल जा रहे थे। इसी दौरान बदलाघाट स्टेशन के पास चलती ट्रेन में उन्हें गोली मार दी गई। गंभीर रूप से घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
शुरुआत में घटना को ट्रेन में लूटपाट के दौरान हुई हत्या माना गया था। मृतक की पत्नी ने भी पुलिस को यही जानकारी दी थी कि लूट का विरोध करने पर उनके पति को गोली मारी गई।
तकनीकी जांच से खुली साजिश
जांच के दौरान रेल पुलिस, एसआईटी और एसटीएफ ने मोबाइल कॉल डिटेल, लोकेशन, डिजिटल साक्ष्य और अन्य तकनीकी तथ्यों का विश्लेषण किया। पुलिस का दावा है कि इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर कथित प्रेम संबंध और हत्या की साजिश का खुलासा हुआ।
पुलिस के अनुसार, जहानाबाद के घोसी निवासी राजू कुमार उर्फ धीरज को कथित रूप से चार लाख रुपये की सुपारी देकर हत्या की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। घटना को लूट का रूप देने की भी कोशिश की गई थी।
तीन मुख्य आरोपी गिरफ्तार
संयुक्त कार्रवाई में रेल जिला कटिहार की एसआईटी और एसटीएफ ने स्मिता कुमारी, अजीत कुमार और कथित शूटर राजू कुमार उर्फ धीरज को गिरफ्तार कर लिया है।
कटिहार रेल मंडल के पुलिस अधीक्षक हरिशंकर कुमार ने बताया कि वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले का खुलासा हुआ है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपनी-अपनी भूमिका स्वीकार की है। हालांकि इन दावों की पुष्टि न्यायालय में साक्ष्यों के परीक्षण और सुनवाई के बाद ही होगी।
एमवीआई पर विभागीय कार्रवाई शुरू
मामले के सामने आने के बाद सुपौल में तैनात मोटर वाहन निरीक्षक स्मिता कुमारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। सुपौल के जिलाधिकारी सावन कुमार ने परिवहन विभाग को रिपोर्ट भेजकर स्मिता के तत्काल निलंबन तथा विभागीय जांच की अनुशंसा की है। पुलिस जांच जारी है और पूरे मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
रिपोर्ट: पप्पू आलम, दैनिक बिहार पत्रिका
Author: दैनिक बिहार पत्रिका
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