नियंत्रित ध्वनि मानकों में ही डीजे बजें, उल्लंघन पर हो कड़ी कार्रवाई: डॉ. मनीष पंकज मिश्रा

गया जी — शहर में डीजे का हाई पिच और अत्यधिक वॉल्यूम में बजाया जाना एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्या बनता जा रहा है। तेज आवाज़ से जहां आम नागरिकों को परेशानी हो रही है, वहीं हृदय रोगियों, बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों के लिए यह सीधे तौर पर खतरा बन रहा है। कई इलाकों में इतना तेज साउंड बजाया जा रहा है कि शरीर में कंपन, मानसिक तनाव, अनिद्रा, उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी जटिलताओं का जोखिम बढ़ जाता है।

हालांकि जिला प्रशासन की ओर से डीजे बजाने को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन जारी की जा चुकी है और तय मानकों से अधिक ध्वनि पर रोक है, फिर भी शहर के विभिन्न हिस्सों में इन निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन देखा जा रहा है। गाइडलाइन का उद्देश्य केवल नियम बनाना नहीं, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य, शांति और मानवाधिकारों की रक्षा करना है।

इस संदर्भ में , राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष, ने कहा कि उत्सवों में डीजे बजाना गलत नहीं, लेकिन उसे हाई पिच और असहनीय वॉल्यूम में बजाना अनुचित है। उत्सव का आनंद ऐसा होना चाहिए जिससे किसी नागरिक को परेशानी या स्वास्थ्य हानि न हो।

डॉ. मिश्रा ने जिला प्रशासन से मांग की कि डीजे संचालकों को सख्त निर्देश दिए जाएँ कि वे नियंत्रित वॉल्यूम और निर्धारित ध्वनि मानकों के भीतर ही डीजे बजाएँ। साथ ही गाइडलाइन का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि शहर में खुशी का माहौल भी बना रहे और आम नागरिकों का जीवन व स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।

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