“लाया हूं बंद करके मैं साफ बोतलों में, किस जात का लहू है कोई डॉक्टर बता दें…” – डीडीसी सारा असरफ

सुपौल में जिला स्तरीय फ़रोग़-ए-उर्दू सेमिनार एवं मुशायरा का आयोजन, ‘उर्दू नामा सुपौल 2026’ का विमोचन

सुपौल। मुख्यालय स्थित टाउन हॉल में गुरुवार को जिला स्तरीय फ़रोग़-ए-उर्दू सेमिनार, मुशायरा सह कार्यशाला का आयोजन जिलाधिकारी सावन कुमार की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्व कार्यकारी सभापति, बिहार विधान परिषद मो. हारुण रशीद, उप विकास आयुक्त सारा असरफ तथा अंजुमन तरक्की उर्दू, बिहार के सचिव अब्दुल कय्यूम अंसारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर जिला स्तरीय पत्रिका ‘उर्दू नामा सुपौल 2026’ का भी विधिवत विमोचन किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने उर्दू भाषा के संरक्षण और संवर्धन पर बल दिया तथा इसे सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक विकास का सशक्त माध्यम बताया। मुशायरा सत्र में शायरों ने अपने उत्कृष्ट कलाम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रमुख शायरों में हशमत सिद्दीकी, बेगाना सारवी, कैसर अली राना, लुकमान दानिश, मो. नजमुद्दीन, असलम परवाना, कौसर आज़म और अफिजुल्लाह अजहर शामिल रहे। उनकी प्रस्तुतियों पर सभागार तालियों से गूंज उठा।

छात्राओं अकलिमा फातिमा और राफिया प्रवीण ने बिहार लोकगीत और ग़ज़ल प्रस्तुत कर कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भरा। आलेख पाठ सत्र में रिजवान अहमद (सचिव, अंजुमन तरक्की उर्दू), मो. बदीउज्जमा और डॉ. नूरजहां बेगम (विभागाध्यक्ष उर्दू, एसएनएस महिला कॉलेज) ने अपने विचार रखे।

उप विकास आयुक्त सारा असरफ ने अपने संबोधन में उर्दू की आत्मीयता और समावेशी भावना पर प्रकाश डालते हुए कहा, “लाया हूं बंद करके मैं साफ बोतलों में, किस जात का लहू है कोई डॉक्टर बता दें…”। उन्होंने कहा कि उर्दू केवल एक भाषा नहीं, बल्कि तहज़ीब, मोहब्बत और इंसानियत की पहचान है। ग़ालिब की गहराई, इक़बाल की बुलंदी और फ़ैज़ की क्रांतिकारी सोच इसी भाषा में सांस लेती है। उन्होंने कहा कि तकनीकी युग में प्रवेश करते समय भाषा की आत्मा को सुरक्षित रखना बेहद आवश्यक है और ऐसे आयोजन उसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

कार्यक्रम में मौलाना निजामुद्दीन अशाअती, सामाजिक कार्यकर्ता मो. मकसूद आलम, मो. ओवैश अम्बर (सचिव, अंजुमन तरक्की उर्दू, पटना), महताब रहमानी (जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, शिक्षा), तारकेश्वर पटेल (जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी) सहित जिला उर्दू भाषा कोषांग के प्रभारी पदाधिकारी एवं अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

समापन अवसर पर आयोजकों ने अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उर्दू भाषा के विकास के लिए ऐसे कार्यक्रमों को निरंतर जारी रखने का संकल्प दोहराया। जिला प्रशासन ने भी आश्वस्त किया कि उर्दू के फ़रोग़ के लिए निरंतर प्रयास किए जाते रहेंगे।

रिपोर्ट: पप्पू आलम, दैनिक बिहार पत्रिका 

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