दाखिल-खारिज में 21 मामलों की अनियमितता पर सीओ के खिलाफ आरोप पत्र की तैयारी

त्रिवेणीगंज अंचल में राजस्व कार्यों में देरी पर प्रशासन सख्त, फैसले से लोग हैरान

सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज अंचल में ऑनलाइन दाखिल-खारिज और अन्य राजस्व मामलों के निष्पादन में हुई देरी को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी सावन कुमार के निर्देश पर अंचल अधिकारी (सीओ) प्रियंका सिंह के विरुद्ध 21 मामलों में अनियमितता पाए जाने के आधार पर ‘प्रपत्र-क’ के तहत आरोप पत्र गठित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, ऑनलाइन दाखिल-खारिज मामलों के निष्पादन में अनावश्यक विलंब को लेकर जिला स्तर पर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। 25 नवंबर 2025 को आयोजित राजस्व समीक्षा बैठक में भी यह बात सामने आई कि 75 दिनों से अधिक समय से 58 मामले लंबित थे। इनमें कई मामलों में आपत्तियां तो दर्ज की गईं, लेकिन उनका स्पष्ट कारण उल्लेखित नहीं था। इसके बाद भूमि सुधार उप समाहर्ता, त्रिवेणीगंज द्वारा जांच कराई गई।

जांच प्रतिवेदन (पत्रांक 408, दिनांक 26/11/2025) के अनुसार, अधिकांश अनियमितताओं में तत्कालीन राजस्व अधिकारी राकेश कुमार की कार्यशैली पर सवाल उठे। ऑनलाइन दाखिल-खारिज मामलों का निष्पादन 35 दिनों के भीतर होना चाहिए, लेकिन कई मामलों में समयसीमा का पालन नहीं किया गया। प्रशासनिक नियमों की अनदेखी और संभावित व्यक्तिगत हितों की आशंका को गंभीर मानते हुए राजस्व अधिकारी को त्रिवेणीगंज अंचल से मुक्त कर स्थापना शाखा, सुपौल में प्रतिनियुक्त किया गया।

इसी क्रम में अंचल अधिकारी प्रियंका सिंह से भी स्पष्टीकरण तलब किया गया था, जिसका जवाब उन्होंने 31 दिसंबर 2025 को प्रस्तुत किया। इसके बावजूद जिला प्रशासन ने 21 मामलों में अनियमितता को गंभीर मानते हुए अनुमंडल पदाधिकारी और भूमि सुधार उप समाहर्ता को संयुक्त रूप से आरोप पत्र गठित कर साक्ष्य सहित प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

इधर, स्थानीय लोगों का कहना है कि राजस्व अधिकारी के स्थानांतरण के बाद अंचल में दाखिल-खारिज कार्यों में पारदर्शिता और समयबद्धता आई है। रैयतों के साथ व्यवहार में सुधार तथा कार्यालय की कार्यप्रणाली में बदलाव की चर्चा भी क्षेत्र में हो रही है।

सीओ के विरुद्ध आरोप पत्र गठित होने की खबर से क्षेत्र में हैरानी और चर्चा का माहौल है। कई लोग इसे प्रशासनिक जवाबदेही की कार्रवाई मान रहे हैं, तो कुछ इसे ईमानदार अधिकारियों के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति बता रहे हैं। फिलहाल, पूरे मामले पर जिला प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर टिकी है।

रिपोर्ट: दैनिक बिहार पत्रिका , सुपौल

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